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পাতা:एकोत्तरशती — रवीन्द्रनाथ ठाकुर.pdf/৪০

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निष्फल कामना

ये अमृत लुकानो[] तोमाय[]
से[] कोथाय![]
अन्धकार सन्ध्यार आकाशे
विजन तारार माझे काँपिछे येमन[]
स्वर्गेर आलोकमय रहस्य असीम,
ओइ[] नयनेर
निबिड़ तिमिरतले, काँपिछे तेमनि[]
आत्मार रहस्यशिखा।
ताइ चेये आछि।
प्राण मन सब लये[] ताइ[] डुबितेछि
अतल आकाङ्क्षापारावारे।
तोमार आँखिर माझे,
हासिर आड़ाले,[১০]
बचनेर सुधास्रोते,
तोमार बदनब्यापी
करुण शान्तिर तले
तोमारे[১১] कोथाय पाबो[১২]
ताइ[১৩] ए क्रन्दन॥


बृथा ए[১৪] क्रन्दन।
हाय रे दुराशा,
ए रहस्य, ए आनन्द तोर तरे नय।[১৫]


  1. लुकानो—छिपा हुआ;
  2. तोमाय—तुझमें;
  3. से—वह;
  4. कोथाय—कहाँ;
  5. येमन—जैसे;
  6. ओइ—उस;
  7. तेमनि—तैसे;
  8. लये—ले कर;
  9. ताइ—इसलिए;
  10. आड़ाले—आड़ में; अन्तराल में;
  11. तोमारे—तुम्हें;
  12. पाबो—पाऊँगा;
  13. ताइ—इसलिये।
  14. ए—यह;
  15. तोर...नय—तुम्हारे लिये नहीं है;