পাতা:প্রবাসী (ঊনত্রিংশ ভাগ, দ্বিতীয় খণ্ড).djvu/১৩৩

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وا\ہ ھ প্রবাসী—কার্তিক, ১৩৩৬ [ ২৯শ ভাগ, ২য় খণ্ড ts७छछात्रवठलांtब्रब छूनिकोब्र वांश्ब्रि इश्ब्राप्छ cमथिष्ठ गteब्र षांन्न । विब बनॉर्कन नांभक *क वाख्रिब्र ‘5डौ' नांtभ sकषांनि कांसा जांtइ । भाषबांकांई बांभक अरू राखिब्र७ ‘कठो' कोप्याब्र गूंषि बांहिब श्रेब्रांप्इ । cनएष भूकूचबाश कठौ' वांश्ञि कब्रिग्न अब्रभांना खो९ ह३ग्राप्झ्न ।... गकण cजषट्कब्रहे 'कéौ" कांtवा *शांब्रभांश्छां'ब्र *ब्रिकग्न ●थकsष्ठ । तिबग्न ७rdब्र गग्रशूबांt१ गद्यांवठौब्र शांब्रभांछ, नमकब्रङब्रtठ विकूयिब्रांब्र ‘बांबबांश', विठ्ठांशबtब्र विठ्ठांब्र बाब्रभांश1. भूब्रांब्रि ठकोंब नांठि चैषtब्रब्र अंप्इ ब्रांषिकांब्र यांब्रभtश्छ- 4श्क्र- cनकां८णब्र थानक अंtइरें वांब्रभांशांब्र wब्रिकद्र cनशिष्ठ शंi७ब्रां यांछ । चडरब हिन्यू यांश्रिब्र बूगणभांब कविe cनकांग्ज हिन्जूष* जड़ेब्र कांबा ब्रछनाँ कब्रिtछन । cनई-नकज कांtषाब्र ऋषा गब्रम जांणeब्रांज কবির পয়াৰতীতে নাগমষ্ঠীর বারমাস্তা, সেখ করমালি নামক একজন কবির গ্রন্থে স্ত্রীরাধিকার বারমাঙ্গার পরিচয় পাওয়া যায় ।... cऔछांषिणठि ननौब्र पैंiब्र चांप्नप्तं ●कजन कवि महांडांब्रtठब्र जत्रूवांग कब्रिग्नांश्tिणन । कुडिवांटमब्र ब्रांभांब्र१७ ७३ नभग्न ब्रांखां ऋ*tनंब जांटक्टन विबछिठ इब्र । अ३ नमग्न मांलांषब्र वश बांभक कूजिनजांभ-निवांनी ५कवासि cनौप्कृचzब्रब्र बांtषtनं छांनंबरठब्र अत्रूषांम कब्रिग्नां****ब्रांछ चैं*ि ऍs*ांशि जांख कब्रिग्नांहिtजब ॥००० कृखिषांप्नब्र शब्र **अबख* बांधक ७कछब कवि ‘बबख ब्रांभांग्र१' बांत्र शिक बांबाबतब चाब ५कषानि जश्राव बध्न कtबन। 4ड़े ब्रांबांझनदांबि वjäौकिब्र शनांक जत्रूनब्र१ कब्रिग्नां ब्रफ्रेिष्ठ । डेह लिग्न ‘जनष्ठ ब्रांबांब्ररण' अषrांच्च ब्रांभांग्नरशंद्र झांब्रांe विअक्लिष्ठ l--- कानेबांध बांग छिद्र चाबe चाबक अशांडांबरठब्र अश्वांनrरूब्र ●थकांनं गोश्ब्रांtइ । दैशांनिtनंब ऋषा नक्षप्र, कशैक्ष श्रब्रह्मचब्र, चैकब्र बन्दौब्र नांव विtनंद छेयञ्जषtषां★ा ॥००० छांनवरउद्र थव्रदांगक बाजांषब बश्ब नांव जांमब्रां भूतिहे ध्यब्रव ಕ್ಲ * चक्रूषांश-अं८इब्र नांव *♚कूक विछब्र” द **cजीविन UFR |*^«s« देशांब •icब्र कांनी इब्रि मख, cचकभांबन, ८कठकी मांन, विछन्त्र ७ख &यझठि करब्रकखन कवि निtवब्र इक्ल, कँiन नeगांनब्र ७ cवहणांब्र छेशांथाiप्न cणौकिक थ* विशांरब्रब्र छtणप्छ बांबणी गांहिष्ठाब नूड नॉषन कtबन । मननांcमबौब्र भैठ नक्तंथथम ●हे कांनी इब्रि पखरे ब्रकन कब्रिग्रांहिरणन । खांहांब्र गब्र विअग्न ७ख ॐ भांनशे जछ छांरक् ब्रकनां क८ब्रन । ** विअग्न सtखब्र *ब्र जांब्रांब्र१ cषरु नांभक ●क वाडि •छनूबां* ब्रध्नाँ कब्रिग्नांश्रिणन । किड विअग्न ७cखब्र পদ্মপুরাণ অপেক্ষ তাহা ছুৰ্ব্বোধ্য।-- देहांब्र गब्र नैठणांमजण, कमलांबत्रण, १भीमजल, एरर्षjब्र नैंiछांजौ यकृठि' दांत्रांना मांश्छिाब्र गूडे गांधन कब्रिब्रांझिण । *ख्णांभजण य*ब्रtन कुकनांष. बांवथनांक, *कब्रांठांर्षी ७: ब्रघूनांष प्रख : *कभजांघबरज' निंबांबन कब्र, भांथबोक्रांर्ष, नब्रतबांध अवर बनटबांइन : गवांत्रबप्न मांषषांsॉर्ष), विध cऔब्रांज, क्जि कभणांकांड यकृद्धि, ५ष९ एtर्षjब्र नैक्रिांजौ य+ब्रट्न, विब कणिकांग ७ ब्रांबजौवन विशाझ्वप्नब नांव विप्नव छात्रषrषांना । ३शब्र गइ tषकद गांश्छिाब दूर्ण । बरे बूनद्र चांकि कवि कडीवान- दांबांनौब थit५ cष भधू छांजिब्रा ब्रिांप्इन, बांबांनी cन अबू गांन कब्रिब्रॉ cशषन्न जाछ कब्रिाड भांब्रिब्रांप्इ ॥“ ठtब्र*ब्र cनांविन्च प्रांन, छांबकांन, वणब्रांभ कांग बांभक जॉब्र७ कtब्रकजब कवि बांधांजाँ जांश्रिङाब्र चt$नां कब्रिटनन 1००० श्रीब्र गब्र चैबtsठछ बून cव-नकन गार्दष अरायडूब गवदथ जांछ कब्रिकांब्र छछ अननंभांcछ थकां* गांशेcणन छैiशां८कब्र नकांवृष्ठगोप्न वांक्रांजी नांश्ऊिँ विt*षछांट्व शूडणांछ कब्रिज । जांभद्ध1cम इंडिभू# cश्रांदिनचनांन ७ वजब्रांत्र घicगद्र खेtझर्ष कब्रिब्रांझि, ॐांशांबाँ &झे नञcग्नब्र कवि ॥००० कवि ८थभमान भूया पब्रिह्णन 1.--छङ्गदउँ बश्तब्र नब्रहब्रि कवि **ांम* डब्रtव “डखि ब्रङ्गांकब्र" अंइ श्रांश्ध्णिन ॥•--द्वांछ त्रुनिश्रुरनव ठांन छूजिप्णन ॥---बश्वनि छनशांनन्च नाश्रिणन-“भश्च विकछ कूशन गङ् भधूल नक ७झू छछ कूछब्र श्रठि अग्नि भधन अङ्ण कूणनांद्रो !--- প্রকৃত পক্ষে গৌরাঙ্গের ভক্রমণ্ডলীর মধ্যে সে সময় বঙ্গদেশে cमब्र• छसिन्ब्र राञ्च1 &थवजङां८व , ●यवांश्ठि हहब्राझिल, cगरेंक्रन् छङ्घ कतिe दइन९थक अग्रश्नश्न कब्रिब्र1 गोबोर्जा भरिप्छात्र श्रृंडे বর্জন করিয়াছিলেন। সকলের পরিচয় দেওয়া অল্প সময়ের মধ্যে गडवviब्र नtङ् 1=== इन्पांवन ग्रांप्नब्र ♚धैरे5ष्ठछछांनंषऊ tवकव भांप्जद्ररे गडब णांनtब्रब्र षन । कृकलांग कविब्रांज चौ Bौटेछठछल्लबिठांबूर७ वह ब्रम कांजिग्नां नेिब्रांटझ्न, किड चीछts छछ खांशबउ यन्न *िक्रिड छखशषरग्न नश्छ tछऊछ शैत्र जडूब्रिड करब । कृकलांन कविब्राय ध्वकद नष्थकां८ग्न कविब्रtछ cनtषांशी जांवTांछ अछिङ्ङि ॥-•• TDDB BBD DD BBBB BDD DDDB SBBBBS बांबक अकथांनि अtइब 4इtण छेtब्रथ बी कब्रिग्रां षोंकिcठ *iब्रिप्ठझि बt । अरे अंइ बांगब्र प्रांप्नब्र चिंड़ बांलांछौ श्निौ उtषांश्न विषय ब्रकन कट्टब्रन । कूक्ष्मांग वांबांछौ ठांशांब्रहे श्रब) जत्रूवांग वांबांजी खांबांब्र कब्रिग्नांश्रिणन। 4हे अंtइ वह tवकष महांछन्नब्र बौवक्কাহিনী বর্ণিত আছে।... tवकर-कविब्र गन-कौéन अहेझ* छांtदcष-नभद्र नवज cत्रोक्लष्ट्रनि तनिब्राँ थव! हरे८ङहिन, fक cगहे गभग्न ब्रांछ अग्ननांब्रां★ cषांषांज बांभक अरूछन **ष-कवि कांनौष८७ब्र अषूदtन करइन ॥ ॐांशांब्र बरे कांनॆषteब्र अशूवांन वाडौड श्रृंकब्रौ जलौठ बांझगंiष्कंन कविाक, जब्रबांब्रांन कब्रङ्गब, कङ्गनंiनिषांब विणांन बांधक जांब्राe करग्नकथांनि अtइङ्गः श्रृंब्रिक्लग्न गांeब्रlनिम्नां८इ l००० बवशेtगब्र विप्नTां९मांशे महांब्रांशांब यूtण बांबांणां छांष cवङ्गण भूeणांड कब्रिग्रां८इ, उiशबरे जापान नषारू थकोtब जाछ कब्रिब्र अषनकांब्र निदन काठ *ठ बाखि कवि णांषj जांछ कब्रिrठtइन ॥ ●रे कुक्कालाञ्च नृप्नब नथिषांन कवि उॉब्रख्छठा --- সাধক কবি রামপ্রসাদ এই সময় জগন্মাতার গানে বাঙ্গালাদেশকে छश्रख कब्रिग्न छूनिग्रांश्tिणन। ॐांशांब नांषरू नवौठ बाउँौठ “विशश्न्वब” ब्रध्नांब्र● "ब्रिकग्न श्रृंteब्रl यtग्न ॥००० ब्रांभयनांरक्द्र भांटनब्र अङ्काउब्र क्षिाब बना बरे गवद्र चांबू cर्शनारे बांमक अकबन करि जबर्डी4हरेब्रांझिटणब l००० कृककञौग्न बूरन बकर्मिएक cवबन गांषक ७ उख कविब्र गरषrt বৃদ্ধি পাইয়াছিল, সেইরূপ বাজাওয়াল, কবিওয়ালা অনেক কৰিও ৰাজাগা দেশকে অলঙ্কত করিয়াছিলেন। দাশরধি রায়ের পাচলি, शां७ब्रांन बघूनांष ब्रांप्बद्र cषब्रांण, अगर अझलि राक्कैठि, कुककभन cणांचाबैौ, ब्रांषांटमांरब cनन, बैषब्र कर्षक, मयूरवन किङ्गब, ब्रनिकष्ठ ब्रांड, रिक्रबांबू, निडांरे बांग, ब्रांबबांबू, नांछूतांदू, cखांण बब्रब्र, জামুনি ফিরিঙ্গি প্রভৃতি এই সময় বাঙ্গাল কবিতা ও গানের পুষ্ট नांदन कब्रिटळहिप्लन । - (चर्छन, यांदिन, १७es } 3रेन्द्रृष१cणनः