পাতা:প্রবাসী (ঊনত্রিংশ ভাগ, দ্বিতীয় খণ্ড).djvu/১৮৩

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[ २s* छौं★, २भ्रे ५७ $48 প্রবাসী-কাক্টিক, ১৩৩৬ प्रांप्नब्र शृठि यष्ठि♚ांब्र जब তিনটি *¢¢नब्र &qरडॉव शृंरौठ इग्न : “वउँौवबांष मांप्नब्र वर्षांप्यांत्री हुठि यष्ठि*ांब निभिख निब्रनिषिङ वास्त्रिक्निंटक जबैब्र 4कs कभिर्छ भंäन कब्र शांदेrorह ।। 4दै कनि♚ विलिङ्ग चरणप्च जर्ष ग१अंह कब्रिटक्न अवश् जर्ष ग१अंtइब्र निभिख ७ हिनांव-ज ब्रांषिबांब्र छना शक् िजांबश्चक इग्न, 4हे कभिर्हे ८षष्ठन cखांशै *बकजण कईकांब्रौ 4ष९ ●कछन जछिल्लेब्र बिंtब्रांत्र कब्रिtठ अर्षिकtग्री हैzवन ॥* শরৎচক্সের জন্মতিথি— গত ২৬শে সেপ্টেম্বর যুক্ত শরৎচত্র চট্টোপাধ্যায়ের চতুঃপঞ্চাশৎ জন্মতিথি উপলক্ষে প্রেসিড়েঙ্গী কলেজের বনিম-শরৎচন্দ্র সমিতি শরৎकटाटक अउिनकन गज अन्नांन कब्रिदांब बना किबिकून एरण ●क नछांब थांtब्रांजन कब्रिग्रांtइtजन । अषTांगक चैकूबांब वप्नTांशांशांब्र नछ*ठिब्र थांनन अंश्न कब्रिग्नांश्रिणन । वह अशांगरू, झांज अद१मजांड ख्रि मख्रष्न cषांश्चाङ्गिांश्च ख्रिश्नtद्द्विजन॥ झांजश्रtपंद्र जलिबन्वप्नब्र श्लेखtब्र *ब्र९कटा भांह बtणन छांहांtठ वउँमांन सांश्णाँ मांश्छि गचएक चानक रुषांर्ष कथl fझ्ण। जांभब्रां डांशांद्र किब्रमश्नं 'नव-द्धिरङ' थकांविड विदब्र#ी हदेtङ ऐंक छ कद्विग्नां জিতেছি । “अप्वक क्वि भूर्ल नूअर्नेौग्न ब्रौवनाथ बर्डवॉन नांहिरछाब्र छांवषांब्र! गचtक अकः कप्प्लांब छांट्वrठरे छैiहांब्र भङांबठ यकांनं कtबन । ठझुखtब्र जांत्रेि श्रांनिक “वत्रबांगै"८ठ अकाँक्ने थरुक थकांनं कब्रि । डेहांtठ जांत्रेि ब्रवैौठानांtषब्र fक &यठिबांन कब्रि बांडे, बब्र१ गरिनtग्न छैiहांएक खांनॉरे-डङ्ग१ गांश्ङि] गत्रप्क ठिनेि शडü सtणtझ्न वैिंक ठछोड़े गठिा कि ना ? किख छांद्दछ जtबहक वtन्नन, जॉनि बडü1 वरणशि, छछल्ले बजाँ fक হয় নি। যা তারপর বিভিন্ন মাসিকে ৰক্ত সাহিত্য রচনা প্রকাশিত हरग्नरछ । cन नव जांषि ग८छूहि ।। ७ॉरें जांछ जांबांटक झूःtषब्र नtत्र वण८छ इटलह cय 4 बिबिबछे अठाख #iनिब्र बछ हtग्न छै#tछ । जlभि cझ्टजtगङ्ग छांजवांनि, 4ष१ जांभांब्र विचांग ८झालब्रां७ जांबांटक अडtब्रब्र म८ब छांजवांटन । किङ <sकथ1थरीौकांब्र कब्राङ गांब्रक्केि मl যে, তার বর্তমানে যে সাহিত্য গড়ে তুলচে, তাতে রস থাকে না, গ্লানি থাকে । - चवञ्च cशैवान बां छांण णांप्नं बांई८का ठा लांटन नl, cर्षावप्नद्र थर्व जांलांश, छिंड बांणांना, कई जांजॉन, किड * पाई जांब्रबिटब्रां★ করতে হলেও মদ-শুদ্ধি সর্বাগ্রে চাই । তাই ভেবেছিলাম, তরুণগণ तक बन निtद्र णांखब्रिक छांtत गांश्sि) बध्नांब्र बबुछ हटक् । কিন্তু আজ এক বৎসর পরে জামার পূর্ব মত পরিবর্তিত হয়েটে ; भन डिख हटब्र #táts । जांब cफ्रांथ cमरण छांदेरणरे cजषां शांघ्र बांबूटवब्र शङ वृखि बांप्छ, ठांब्र मांज 4कÉब्रहे बांब दांब्र चांदृखि बब्रl कटबछन । जांभि 4 क्षिप्ङ्ग छङ्ग१ गांशिडिाकरणग्न कॉर्टेक कॉफ़ेtक बिछांना कtब्रছিলাম। তাতে ঠাৱা বলেছিলেন, “আমাদের জন্ত কোন scopa cबहे जछ cकांब नांश्छिा ब्रछनांब्र ¢क्रब जांबब्र! शांदे नां ।” चांद्र खांद्र यङ्काउरब वरणशिलांध-4 गबांtज जानक इtरङ्गक्री जांटझ् नङ], क्खि 4 बौषटन जॉब्र७ cवननां जां८ह ॥ छ कि ८ठांनद्रां जां८इ बांनि, किड़ cवहांटन गांश्ण &थकांटर्न विशंtषङ्ग गडांवब जां८इ, cगणेिटक cषम ८डांबब्र नबखरै अचैौकांब कtब्र छण ॥ फांब $खरब छैiब्रां वाजन-eनव शिकू नांश्छिद्र बन्न, छांशांछ। अांबब्रl ७णव नक्लि नाँ । जांभां८कe öांब्रां बटलङ्गि८णन cष, जांबि जम्ल कांtछ घteग्नtब्र नांकि गांश्८िठीब्र कठि ह८छह ॥ जयश्च किडू कठि इब्रद्ध हtब्रtझ् । किड़ बांभांब नेिनe c*व ह८ब्र cगtइ ! cठांमब्राँ ठङ्ग१, cछांबब्राँ ॰निःश् चक्षूणब्र श७ । ८शत्र । चांशांब्रि ७ षना ८णcर्च्झ गशिखा किङ्ग किङ्ग गछ जां८इ छांटङ७ cवषtठ गोरे, ७५ 4कt) झईष बाँ • अक िनभल्लो नग्न नभोज ७ औष८नम्न पिठिष क्८िकङ्ग, विविष गधल्लोब्र আলোচনা তারা তো বেশ প্রাণস্পশী ভাবেই করে গেছেন। ब्ररौौवनांष शठ कफ़ क'tब्र १ =षां वरणहिटलब, ठठ कछाँ क८ब्र वन्दाब कभङl थांबाब cनश् ॥ ७ षाकtण cनक्रण उitबरे श्रानि छांब्र नेिनचाँ कब्रडांभ । মিউনিক বিশ্ববিদ্যালয়ের বৃত্তি— भि8निक विचरुिक्षIांलग्न सिखांन विकांब्र अछ ठिनछन छांब्रडौग्न इtज८क बूखि ग्रिाप्झ्न। अक्९णद्र छिक्छन बाक्रीनौं ७३ भूखि गाडेब्रitइन : छैiहांटकब्र नांव-(०) छा: त्रिग्रेोठानांष त्रूषांशोषTांब्र, ३नि षांजीविनm नच८क गtवष*1 कब्रिtदन : (२) चैबूल कांजिणन वश (कांक दिच बैबिछ*ांछब्ब५ tगन विनTांजग्न ) *कांपबिदा ७ ब्रनांग्नब गच८क भएवदनंt नचरक नtवदनंt कबिंटवव, (७) देaिऔब्रांद्रौ३ नचटक श्रtवदनं कब्रिसांब्र अछ cष वृखि DDD BL KS DDD DtBDDDS DDDD D DDD GLLL DDB BH HBDDD DDD DHHBDD DDD DD tवशन कि cछांबांध्वज dयंiz१ जॉtनं नाँ ? जांब्र नभांद्वज७ छ ७छ

  • श्चिनिब्रांबौ९4द्र (बांक्षनूब) इज चैबूङ जिeनांछब्र१ cनन । ऐ७ि

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