পাতা:প্রবাসী (ঊনত্রিংশ ভাগ, দ্বিতীয় খণ্ড).djvu/২৯৩

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R&& প্রবাসী –অগ্রহায়ণ, ১৩৩৬ [ १5ने छैन, २घ्रं ४७ नान्नैौमण षांक शबकांब्र। बडून वांनिकांप्नब्र ऋषा निकांब दिखांब्र *ौज इeग्नां शबूब्रणब्रांश्छ । (s) &वांशभिक निकांब्र छब) बtत्र शङ बाञ्च हरेप्स, डॉहांच्च जtर्कक बोणिकांविमTांलग्न हांशंदन ७ श्रृंबिछांजाब बjग्निष्ठ ह७ब्रां क्लॉरें । देहीं अठाड छांग्नमत्रड थलांस ॥ जठि और्षकांण शब्रिग्नां शांजिरूitणब्र चिंचक अबtइजिठ ह३ब्रां बांनिहङ८छ् । श्छब्रां२ dहै &थछांटर कांहांब्र● जां★खि कब्र पुंफ्रेिष्ठ बब्र ॥ - (४) थोषभित्कङ्ग शब्र छैक्रउद्र विक्रोद्र अछ श्ठ वाग्न हरेटक, छांहांद्र जडङः निकि अ६* cथळग्रtनग्न लिंकांब्र बना वाब्रिङ रुखब्र जन्ड । रेश० मन्भू४ शांबनवठ अषार । (७) २ांजिकारकब्र यांषविक गां★लांण श्रेष्ठ करणज्ञ गर्षीड &धाडणूक निकां★यठिéांप्न थ*क्त ८षजांब्र छांब्रभांब 4ख१ वTांब्रांtघब्र वjदह थांक ७कांड जांसञ्चक । विक्रिडl अहिजांब्र! चांत्रांब्र जां८वषtन क4शांड कब्रिzण जांमि अत्रशूरौउ श्ड़ेर । दक्रजचौ-कांठिंक, ५७७७] ইরামানন্দ চট্টোপাধ্যায় “লাগে টাকা দেবে গৌরী সেন” कणिकांछ e ७ब्रिकछेदउँ इांरब 4ाका यवांश-कांक) बहकांज हईरफई छजिग्नां श्रांनिष्ठरछ । यबांश पांका*ि s३ ३ -“शांtत्र केांक ८क्टव cऔन्नैौ tणन " हैहांद्र जर्ष dहैcन, रुक् ि८कह जप्रैीछांtस दिनtन भटक, ठांश इश्tज cनीबौcनव जर्ष किब्र ठांशांप्क विशन हरेंrउ ॐकांब्र कब्रिह्ऊब । देह चांब्रl =णडेरे यडौप्रमांब हई८ङtइ tष, cगौबैौ tनन णब्रइ:षकांछब्र, बूख-रख ७ यहांच्चाँcनांक हिरणन ॥--- भइब्रहणजौब निकट वांजी-बांभक धक हांन बां८इ ॥ cगई हांटन श्ब्रक्लक भूबांब्रिषद्र cनन बांधक अकजब गांभांछ शृश्इ cणांक बान कब्रिाउन । हेनि जांटिाङ इद4-बनिकू हिरणव । श्रहांच्च tर्णाद्रौ লেন ইহারই পুত্র। গৌরী সেনের প্রকৃত নাম “গেীশঙ্কর সেন।”--- इश्वनौ विवांनौ शशंशिष्ठ ७ यङ्गउचति९ चर्नभङ भंडूsञ cन, दि वण भहांश्नंब्र दtजन ८ष, ॐवब्रध्छ cनन महानग्न, cनौबैौ cनटमब्र अवलन अडेन शृक्ष श्लिन । नष्ट्रराबू s००० इंडेirजब किङ्ग भूरलैं अत्रबदायूब ऋष अऐ कष सनिब्राझ्प्णिन । नळूबाबू उषकांप्ण चांद्र७ वजिब्रहिाजब cष, ७०० द९नब गू* cनौघैौ cगन बग्रजश्न कब्रिब्रांझिालन : इछब्रां९७ठशत्रूणांरब ४७०७ इंडेiप्ल छैiरांब जश्च हरेब्राझिण । किड जs. गांtश्रवद्र यवएक बांविप्छ गांब्री बारेrठरइ cष, वक्लवाबाब निवांनी ४षशवछब्र१ c** s१०२ इंडेॉरण cऔद्रौ cननरक चर्शकैषांब्र कब्रिब्रांझिटणन । श्छद्रांश् नंबूतांबूब बाउ cरव गांड cर, रषन cनौबौcनन सक्दछब्रार्थब्र जरनेकांद्र ह३ब्रॉ कॉर्षी कब्रिट्ठश्रिणब, प्ठपन छैiहांब्र षङ्गः:कत्र »s७ पक्ष्णब्र, किरू देश अनखद । cवॉष रब्र, अॅवब्रबांबू जांगनांरक cत्रौबौ cश्रवा चेष श्रृंङ्गष बणिझt पृण बबिंद्मांश्चन । श्ण झषाँ ८१ cर, नजानेब्र बूटकब किङ्ग शूरसंह tऔजैौ cनब ७ tवकदछब्रन वांनिंबा अवजचन कब्रिध्नां छेउरब्रई थबांछा ह*ब्रांख्रिप्णन ॥ 4ाठन्वांब्राँ जत्रूयांन इद्र cष, नखनन-नकांकौब्र cनषछाप्नं किश्ता जडेशन-न७ीर्णौद्र याब्रप्च cऔद्रौ cनाबङ्ग अग्र हरेब्रॉक्विज ॥००० cैौद्रौ cनाबद्र निष्ठां हरबक्लक ८णन जवहां★ब्र हिरणन नीं । ठिनि ●कबन गांनांछ शृंहइ भांज हिरणन। cत्रौग्रौ tनन कांग्न cङ्गनं गांवोछ सJषगांग्न कब्रिtठ थांब्रख कtब्रन ॥००० उ९कांtज कणिकांठ-वक्लवांsitब्र ६वक्दछब्र१ cनं# बांत्रक अकबन षनांछा छढवांद्र बांग कब्रिाउन । ठिवि cषब्रण षटन कूवङ्ग, cनरेंकरण षप्áe यूषिडैिब हिटणन 1•••कणिकाडांब्र बोक्नेौन-ऐठिहांप्नब्र बांबाँ BBB DDDDBBDDD DD BBDD KSLLL DDS DD DD LL cकांच्णांनौब्र गश्ठि ठिनि बांनिबा कबिब्र। बहूद्र थर्ष sगां6न कब्रिब्रहिटणम । जभाग्न नप्रtग्न ठिनेि ¢कांग्णांनौ८क छैtक थांब्र भेिघ्रl éांशां#िtर्णब्र वtशहे छेwकांब्र कब्रिtङब ।। 4हे देवकसूछब्रर्ण छ९कtरज 4कश्चन शबष निषॆवांन् श्नूि गिङ्गां विशखि श्रिणम ।--- tरकवष्बन, cर्नाङ्गैौ cनप्नब्र गांधूडl ७ थांबिकडl cषषिद्र ॐांशॉ८क चौश्च दाबमां८ग्न खश्वॆनांब्र कब्रिञ्च जर्देब्रांझिालन । *अकबांब वक्षछद्र१, जश्नैकांब्र cगोब्रौ cगानब्र नांtष ●क्लब “मखां” उग्न कब्रिब्रांहिएलब । किढु शृ८ब्र ठिनि cषथि८जब t५, अ३ बलांब नाव बहूद्र-गब्रिजांt१ cबोगा बिबिठ बरिद्रांप्इ । उषन लिबि cगौबैौ cननरक कश्रिणन, जां°नांब्रहे (नौछांcना अरे मछांब मtत्र वङ ब्राशीं ब्रश्ब्रिांटझ् । हेइ वेिकद्र कब्रिग्नां ८ष लांछ हर्शेरब, ७ोहाँ जांनर्मिहे जड़ेंट्सन, जात्रि जडेब ब ।। 4डे रुजिब्राँ नभख लांtछब्र छैॉक tवकलछब्र१, cत्रौडौ cननzक जांशांश नङ्कांtब्र थकांन कtब्रन ... cऔऔ cनन *ई गभग्न हड्रेष्ठ३ यडूठ वन छैशांबंन. कब्रिट्ठ जॉनिंtणक् ॥ छैiहांब्र 4३ वन म९कांt१३ वjग्निद्ध हईrड लांनिज ! शैव-छट्टशैौ cणांक जकल ॐांशंङ्ग निकट भांहांश viहेग्न बां★बांटमब्र इ:ष पूब कब्रिटङ जांगिंग । देहे-३छिब्रा-८कांच्णांनौब्र मबछ बांशांब्रt ८कनांब्र ग्रांटग्न ८धtज वॉरेख, छांहांब्राँ रुग्छनि नl cमन भब्रिटलांष कब्रिtछ श्रृंॉब्रिट्, खङशिंब ठांहांब्राँ tछरण जांबक थांकिङ । एडब्रांश् छौवtन cजनl cनीष कब्रिटङ नां शांब्रिट्ज३ cखtनञ्च ऋषा ठांशांटमब्र शृङ्का श्रेष्ठ । अहे cश्छू, अर्थन७ जांभांटक्ब cऋ* aहे वकफै। यवांग कनिब्रl জাসিতেছে,-“তোকে জেলে পচাৰ ।” - cनौघैौ cनन cषज्ञ* तिनौ, cनश्ङ्गण cठछदौ हिtजन। बलब्रांत्र cनन बांधक ७कछब श्वबांछा बनJ हtडौब्र छैvitब्र छांशिग्न ४१करुiब्र छैोझाएक विमङ्ग१ कब्रि८ङ जोप्नन । शंउँौग्न प्लेणछ इडेहउद्दे बिश्वब्ज५ कब्राग्न cगौबी cनन जांगनां८क जवभोनिङ भद्रब कब्रिग्न बजब्रांभ cनबरक कहिप्लन, जां*बि बगि हांखलाँ हरें८छ तांत्रिद्र! जांनिम्न जांभांt+ निमज्ञ* नाँ कtब्लब, खtव बांत्रेि जांगनांब्र निभङ्ग१ अंह* कब्रिद जी । बलङ्गांब जबछांग्न ७ ८कोषङ८ब्र हॉडौब्र छैथ्रब छोणिग्रां कृणिञ्च! cगtलन । cनौद्रौ cगन बथन-७१न नित्र बाँध्रप्ऊ भश-णवांtबांप्र किब्रांकणांश कबिtडव ।। 4कदांब डिनि ८कांन सेिप्चैष कांt{iब्र छेन्जएक हत्रणौ ७ जब्लांछ हांटबब्र चल्लॉर्डौघ्र ग्रं५८क बियज़१ कब्रिव्रां३िtजन ॥ लेिनि cष cरूवण छैiहांक्निtक श्रृंब्रिtडांव-नूर्विक जांशांब कब्रांड़ेब्रांझिtजन, ठांश बार । यrठाक निबजिठ cणांकाक यहूद्र वन-गणखि७ यांन कद्विब्रांहिटलन । तबिtछ *ांeब्र! वांग्र, नंबांब्र श्रृंछित्र णांढङ्ग ८ङझ् कषबe 4ङ्गणं नमांtब्रांtर कां{ी कब्रिtछ *ां८ब्रन बांडे ! tष ¢कांन वासिब जर्षीखांव हरेछ, cन गन मटन बोनिङ cद, cत्रौद्रौ cनन थांदइन, जांबाब छांदबा कि ?-अश्बछड़े “नांप्न $ांक (ऋष cनौबौcगन", ●रे ●बांक-वांक बङ्कांण इ*tछदै बांबांनl cनट छजिब्रां जांनिटड८इ ॥ পঞ্চপুপ—জাখিন, ১ee৬ ] ঔপূর্ণচন্দ্র দে