পাতা:প্রবাসী (ঊনত্রিংশ ভাগ, দ্বিতীয় খণ্ড).djvu/৪১৮

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ও সংখ্যা ) কপিাখর-সুৰ-সন্মিলনীতে উপেন্দ্রনাথ বন্দ্যোপাধ্যায়ের বক্তৃত৷ ●ጫ? छबदकृङ इलेब्रां ॐiहांtरू नूनः श्रृंबंड नैठ णिथिब्रां बुवांक्टन शो#ांशेषांब्र अछ जबू८ब्रांथ कब्रिटङम ॥ ॐiहांटक्इ ऎछ अनशनांचूछक अरेcब्रांरू चडिाइकट्ठा उच्च्चम्ष् ♚रग्रंiदिन्वकरीखछन्यमभिरान्छ*दनद्यांत्रिरज- ६ बांबीडः कक्लिांकणी-ब्रिवणः कृरकम्यूनचकछांक् । अक्बीबदबॉण्णिांबाकूषां कृबन्नबूजांश्छन् नकईछiनि छत्ररक्लॉडर बजवान छरब किबछ९ नब्रम् ॥ =(ভক্তিরাকয়, পৃঃ ৩৯ )। ••-मावटावांबू वtजब, “कर्दीख cनोविन्दवाप्नब्र छांषां 4मन भांॐिङ, उiहॉब्र भरणब ॐचर्षी बख विनूण cव, बांजांजौब नरक cनक्कन खांषां वदतां व1ग्रन्शू{चलखश् ॥" शक्डि अ* पूरिङ जलाख जनांब्र ७ जूलारीम, छषांनि जांवि और इांध्व वाषrह कठकखणि नव eद,छ कनिष्ठ cषषांडेरजहि cद, cनांविन्चनांदनव्र नमुनांबवैिंक ७ श्रब्रवतीं जटवक कवि cभविषषां८णब्र बछहै बांॐिख ७ छ्जजिङ खांबांब्र *क ब्रहबाँ कब्रिध्न निब्रां८इन । नक्कन्नडक्र श्रेष्ठ ववृव्ह करजकल छपाइबन फूणिज्ञां क्टिखहि । विकछ-जहबांब-छांन-बूष-अeण निलै-छनिब ब?-५aान cबाञ्च । fशद्ा श्रृङ्-शtहि-शiण ७१tङ्गरे " " बtवश्च प्रiषि १छ्जश्ि - CUĦI ll वब्रनेि बाँ हब्र ब्रान् बब्र१ छिरूबिब्रl ॥ किtन्न घननूल किtब कूषणद्रवज किछ कांबब्र किट्टद्र देवनिजबनिद्रां । जबष बनइ हांब्र ब१ि-क७ण छब्रटन इनूब कs-किकिनि-कनब1।। चलङ्ग१-पञ्च-1-किब्रह१ जन छद्र छब्ब कांणिनि जtण षद्दइ छांग्रकि চলল । पूकेिष्ठzक~* cव-१ कूइबांवणि चिंब्र श्रब्र cनांएछ चिंधि-छांचकि इांदन ॥ জলস্থমাস-গন্ধ অপরূপ জাৰণি সকল-ঘুড়িমৰ পড়ি গেও কাজে ॥ —(পদসংখ্যা ২৬৮ ) ॥ कांबब्र-ज्ञप्लेिइब्र ब्रब्रनेि विश्वांजा। उहू गब्र जलिनांब कब्र जबषांजा । ष८ब्र गz१ निकणटा ६षहञ cछीब्र । निश्चjया-ग्रंथ-श्रृंडि छळजिह . শোয় । ००-रुज-लांश्टिङा जांब्र बांह किङ्कब्र जखांच थांकूक बl cरूब, न६कविब्र जनडांस cकांबकांग्रजड़े हिज मां । खांबांला जांश्tिठ कांग्लाद्र बांगङ्ग ठिंब्रकांगदे चांटइ वts, किख् कविप्रब औवन-कब्रिफ ७ औदन-कांज नचटक बांबांजी छिद्रकांन* चलिभांजाब्र छलांनौन । चांधूनिकभूक बब-जाहिरडाब cथ* कवि छडौशांन । ॐांहांब जांविर्डींबकांज ७ बौबटनब्र शक्नेन गचट्टक जांबब कि बॉनि ? सयूकङकeनि भन्नबाज : अष९ ठांशद्र जांविडीव नबन्न जरेह चांग्णांछनांकांग्रेोब ब्रsि, डेव्ह थव१ शक्षिांबङ नकष* श्रेष्ठ नखमनं नष्ठांकी नदीड $ान-हिछछ। अनिष्ठविण । सपू बबूल क्नडबधब ब्रांत्र विषकाच्-अशनष्ठ कईक बैङ्कककौडंब जांविकृठ ह७ब्रांtङ छांदांउपविषूक्tिनब्र गोशtषा अकs cबॉछेiबू नबराब्र वांद्रनी इश्ब्राटइ बांज । बिछांनसि नचरक चांभांप्त्रब जप्वक डूण थांबनी हिज ७ जां८इ ॥ cन नकरणब वषांद९ cकांन औयांश्न हब कांश् । वहांमटशांनांवाॉब्र वेबूड इजबगांव नाडीমহাশয় তাহার সম্পাদিত বিভাগভিন্ন কীৰ্ত্তিলতার ভূমিকায় ৰিজাপতি गपटक चरनक मूठन ७ बूलाषान् ठषा यकांन कब्रिब्रांप्छन । बाबूल सनलकूबॉब छdèां★ांवrांड़ जहां★ब्र कर्णिकांड विश्वविषTांलग्न ह३८ख “twists Journal of the Department of Artsa futoso गनद्र निर्षांबन गपएक अकॉले पूंब यूनावांन् यवक निषिद्रांप्इन । ऋगबचांदू ककिनषद्र, कविब्रश्चन, ब्राब्र छन्णछि, निश्दइनडि बकृखि नखष जनछष छलिखांङ्ग अक् षट्षष्ह विप्लांनकिब्र पजिघ्रl siणtड़ेब्र निटख छांटइन ॥ *खांविग्नl.८पविष्टा भनिक tवधिदृश* विछोणछिद्र भtपञ्च गर्था 4क नउल्लेब्र अ६ दांश्टव कि ब cषांबखद्ध गाचड़ । कृखिषांन जड दड़ कवि, ●iहांब eत्रिवि७ *ण* cर्नाटकृचत्र" जड़ेब्रा चन्त्र अषब७ फूलून छजिएउटझ् । कविककन बूडूचबान ज३श चांटणांध्नांब नषण ८७ ८कवन “छिहिषांब बांबून नबिन” ● “दछ बाबा बांबनिरह” । शचन्द्रबांन ब्रछब्रिखt क्खिन्न-खरखब्र वर्डबांब वहचषज्ञ खेiह इडेटख औiछ चूक्व बाब : LDDD DDBB D DDGGC DDD DDDD BBB BHDC GBB हरेब्र बैंiछान ! पूटबद्ध कष वांछक, cनक्विकांब छांद्रच्छटा र ब्रांवबनाव गचरकई पी जांबद्ध क७ड्रेकू बांवि ? छांबउछटा गचtब्र DDDD DDDD BH HMM YaBBBD DD DDDZ CCSDDE जिथिब्रां निम्नांहिटलब, जांबङ्गl cनरे कक्-िकहिबौ नकटजब्र नूनङ्गखि করিতেছি মাত্ৰ ।

  • ३ cखा जवश । केहांब बटश cनक्निकांन-कविब्रांज इरेटखटखन अकञोज रुड़ कवि, वैहिांब्र जवटक =णडे, विडूङ ● नख) *ब्रिछब्र गो७ब्रां वांछ । ऍशंब्र शिंष्ट्रकूण, बांष्ट्रकूण, उक्रकूण, क्बू-जबाब--८खहरे जलांड, जषाांड बtरुन । संपू छांश३ वप्र । वचनादिरडा बांश जबछडूछा छ, खांद, जर्षt९ cनांकिण्वनांन-कविबांटजब्र कांबाब्रछबांइ

●कल्ले यांबांगिंक ७ दांब्रtवांहिक देखिहांन जांद्दछ । देडिहांन-यषखि बऋषभ ७ वथ-नीहिटछाब्र गब्रब cनौछांना । किख ●ई cनौजांनाई ष जांबांrवद्र गशिव cकवन कबिब्रl ? नन्गू{ गबिछद्रपूल ५३ अकबांज कबेिब्र वधदृषटष् ८कोब उद्विक् हिज बां वजिज्ञां जांबज्ञां cषब्रांज cषषिzछहि । ऐचिहान-नद्रचर्डीब्र जणूक क्जिन ! 颜 cनांबिबकांन-कतिब्रांब €iहांद्र कविख विसख ध्वविज-खांबांब्र जिtथन बांझें । छिबि cष छांदांव्र जिषेिब्रां८३ञ, डांइ ५कड़े बिअ छांव । बड़े छांश विशुrां★द्धि नबनांभब्रिक &थीछेौब tबर्थिज खांबाँ इश्रख eडूड अदर बांबांना खांबांद्र बननक्षप्न गतिग्रहे ७ नजिबर्षिछ। शोष्कोणं किं Gर६ बाँकोणौ विद्म ८जषशैंस्ठ ॰ंश् चुषांब खाच॥ ब्रांषांकूरकब्र ८eयम-विजांन ●वश् चॆदॆछष्टछटपटवब्र जीज-यनक्ररे 4ारे खांबांब्र $न्डौवा रुख वणिब्र, बांधांज1 खांबांब्र ●है जॉहिणिक श्रृंकनmइ बा छनछाषा “जजबूली" बांtबहे बनिक । किड aहे गब्रजांश अथव ভাৰ-তক্ষয় অঙ্গীভূত হইয়া গিয়াছে। প্রায় ঢাশিত বৎসর পূর্বে * बिब छांदांब्र छडव दब, अवर बांबूनिक दूत्र गरीख आहे छावांद्र गांश्छि|-ऋ* छजिब्राँ जॉनिटङ८झ् । बकिभsटा, ब्रांजकूक ब्रांत्र, ब्रवैौखनांष, इटबनष्ठा पछक, कांजिकान ब्रांद्र बबूष करिब्रा क्रिन नष्ठांची गर्दjउ जजबूलौ गांश्रिडाब्र केंद्धिशन केiवित्र चांनिब्रांप्इन । cनांविन्चकांनकविब्रांब ** क्ङ्गिरठ कांबी-मांहिर७Iब्र tब* कवि । दिक्कनबांद्वज ॐांहांब कविटचाब्र य८षांछिड जॉ८णांछबl ७ जकांक्ङ्ग ८डां हृद्धहै बांडे, छेनब्रख बांबांक्षि जबाज़क उथ बछांबिछ हरे८डटझ्, देहां वकृदे इइ८थच्न दिङ्ग । (সাহিত্য-পরিষৎ-পত্রিকা,১৩৩৬,২য় সংখ্যা) বীজকুমার সেন উত্তর-কলিকাতা যুব-সম্মিলনীতে ঐযুত উপেন্দ্রনাথ-বন্দ্যোপাধ্যায়ের বক্তৃতা तनिणांम, चांगनांब्रां७ बांकि 4कsi छेछब्र नकdछेब्र बांधक পড়িয়াছেন। দেশব্যাপী প্রচণ্ড দলাদলির ঘূর্ণাবর্তে পড়িয়া আপনার बांकि इबिब्रां चकाकाङ्ग ८षविटङ जांब्रख कब्रिव्रांtइन । वrांशांज्ञछे