পাতা:প্রবাসী (ঊনত্রিংশ ভাগ, দ্বিতীয় খণ্ড).djvu/৫২৮

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৪র্থ সংখ্যt } काष्ठांब ऋजा इpिrउ षाहक उोश dदे,-वाशएक बडबिन ७ठ cत्रtइ जाणन कबिंबा चांगिणाब cन चांब नद्र हद्देश cर्णन ! हेश छिद्र चनतिछिड चावडेमौब्र छिठब्र भक्लिब जिसकछा इथैौ इहे८ख शांब्रिट्व किना, छांशe चक्क फ़िखांब्र विबद्र नग्न । डाई cबांश इद्र शांभा-कवि बन्न-दवृब्र दांबांब्र गर्थौठछलिएख्हें जमख बाषांटक क्लन बांन कब्रिड्रांरह्म-- s । बग्ननडांब्रl &वांथ cनौबौ हांब्र' हऎलांब त्रिद्विदब्र । fक चध cगविलांब बांभि छैभा बि८ङ जांनल हुब्र । कि cबषिजांव, कि तमिजांब, वे इःtष बूक cक्टके पां★, ७भोग्न दिएब्रहक cषरक् Gोए१ पैiछ। हऐण कोब्र ! कठ इश्tषब छैन चांथांब, त्रिब्रि पूवि जांब न, अर्ड नाङ्गैौद्र नंड cवजन बका नांबौबूक न ॥ कि पध cशषिणांत्र निद्रि, जांबू विनिं यछांदङ, फेब बॉनि निरब्र बनि वा दजिटब्र कांग्च दृठ८ङ ॥ इiह्म त्रिविश्वङ्ग, एींद्म निक्षिब, एiद्म fद्विविद्म ख्रि नि, छेवा हांछ यांनं वैitछ न, बtव बांe cमांब्र बां4 cत्रौब्रौ ॥ ग€शैौटङ जांनज छैम, जड़ेबौ छ पकिंज, नक्शैtछ वलभू4, बारण बनयोरठ छणिज ॥ লেণ্ডটা বেটা, বুদ্ধি মোটা, ভাঙ খুন্থর সম্ৰাট খায়, बTांज छ* श्रृंब्रिशांब छोण छांज cवांटछ एछांब्र कांचिट्ठ कांनिध्छ छंथाब्र भोटक यनंiध कब्रिज, जिtब्र हरड किंब्रां भांच्च ८ग जांबैोर्खांम कब्रिज । नांविजौ नभांब हetन, बांछक cनां cछांबांब्र इचैंछि, गां★ ज1 बछि झांदेछ बांटन, बांबांडेब्र हर्छक cन इबडि ॥ ९ । cछटफ़ बांट्व किन छैन, प्रिंब्रिशूबो जांकांब कtब्र । चांबि cकबन करब्र, नूछ षटक, ब्रहेब cत्र cछोप्न नl cरप्द्र ॥ এ বর হইতে ওম্বর বাইতে নেটে লেচে মেচে, बर्षज ष'tब्र cवक्लोरेट७ थांकrठ कt८इ कttछ ॥ নিশিন্তে ঘুমেন্তে থাকি, স্বপনে মা তোৰে দেখি, cन षन किन छून पांकि, ऋण व गांषांनै बrtब्र ॥ ग'शिणींष ७षicखांशiद्म ७ि५tङ्गौश्च नि, कूबांद्र तपॉकेटब्र बांटन cक क्रिष cभी cछांटन, खांडे द९म बटन नटफ़ cव कदब बांटब्रव्र चडटब, जांषि cन इष बांगांव कांटन, छूहे भाँ एप्न वा बूकवि भाद्र ॥ uहे ग्रंॉनखणि विजब अथवैौब्र गभाग्न७ शैछ इह । विबांटरब किडूनिन नदब्र चछद्रश्रृंश् रुहेरउ चांशै जह बबूब निकृत्रूटर वाहेबांब ७क,ि बैौखि यष्ठनिऊ चांदइ, देशांक दिब्रांग्रंथन बटण । dहे गयटन नेऊ इद दो७ cरु निंकि, खब्राँ कब्रि जांबिटख &यांचं छैनांटब्र । हरेज वदनम्न भड, बांt१ वर्षी बां*ि बांtव ॥ तबिबांछि बिनूबांत्रि, छाबा कडेटज्ञटइन cनौबी, जांवरच बुक्ख छ,ि স্থাশীমে মশানে ফিরে । शङ ब्रजभी विवॆरष, cशथिब्रांहि चनटबद्दछ, ॐअl cकरब ८कटप वरण, *ज1 बरव ब1 कब्र ८बां८इ ॥" नब्र६कांटण ८ष जनञौ चांबांटरब श्रृंटर जांटनम छैiशंरक ত্রিপুরার গীতি-কবিতা ৪৭৯ बांडानैौ aाषा कवि उगू क्लअरबनषांत्रिकै बनवमर्नी ब्रtनरें अंश्न क८ब्रन नाहे ; च थांश्च बन्नका निश्नहांब्रा लि७ कछ क्ल८णe cनषिद्वादरून । cनषाटन मांटबन्न ७है वैवर्षी नाहे, चांद्रह कछांब्र शंब्रिजा चाब्र झुःष । खाँहे कबि जॉन ? I ब्रॉनै, tषe cनै छब्रक्षबिं । cछtथांब छभ1जदेब्रजांगेिण अग्विबी ॥ aएक सङ्ग छैषद्र चंद्रज्र मजद्र, छांप्त्री बूकि बचबध्नौ चांनन हिबांणद्र ॥ कँमा cकांtजटङ जांवि, वनांखेरजब ब्रांगे, जांन जांभांद्र $ांक्षवनी बूको७ cना आणेि ॥ जात्रि लिखांना कब्रि (हान छाबिक, cरूभन कडेब्रl stब्रह श्रृंtश् जोहिणां फूनि ॥ ब बरह वांगे, तब अबबी, ब cगब्र वरण हबबांtथ, छै८कृङिल ●वॉनि ॥ बांथांशे कि जांनब निचिंद्र चनब, üभां वनzक बl cषथिट्टण खाजि८ब औषन ॥ এক পাগলের পুর, গুলিতে জৰুং, 'वंींश्च बिंोंरब नििब्र Giनि खेडा ७ ॥ বৈষ্ণৰ ধৰ্ম্ম ও সাহিত্যে বাৎসল্য রসকে অতি উচ্চে স্থান দেওয়া হইয়াছে। ষে ক্ষুদ্র শিশু দরিজের পর্ণকুটীরে আসিয়া ধরা দেয় তাহার ভিতরে তাহারা বিশ্বরূপকে প্রত্যক্ষ করিয়াছেন। তাই ইহার ভিতরে এত রস, এত cनौमर्षी ! गांशरू कबौद्ध छैiहांब्र श्रृंख खश्रिदाब्र नब्र ८ष পদটি রচনা করিয়াছিলেন, উহ। তাই এত মধুর! বাঙালীও ७हे ब्रग इहे८ङ दक्षिङ झड़ नॉहे, थांभा-कवि जाटन नांटन এই আনন্দকে প্রকাশ করিয়াছেন। ত্রিপুর জেলায় णखॉन खन्नाशझ्ञ कब्रिटण निम्नलिथिऊ जबौठ शैड हहेंब्रां থাকে— ভগবান পুত্ৰ পেষ্টয়ে, জানৰে কোলে লিয়ে, রাগ নিজ ৰায়। cनां★iांज कोनिवृह बl cब्र-* जांभांब ¢कांटल चांक ८ञ्च । কে ভোৱে ৰলে কালো=গোপাল রে cष cडां८ब्र वtण कांद्रण, छांद्र किtइ दां* बव्रब कttणा । ॐ cछांब्र वैज्ञ८ण चककtब्र क८ब्र चांदणीं ॥ ( cनां★ांण कांनिझ मl cब ) ●कक्बि cपकेषांsि cडांरब्र वृखिक cवांथरबब्र कांटल, ङअङ बकां७ cगदेदीहि ८डीब्र वक्रन द्व (গোপাল কাজিছ না রে ) । हिज cडांब्र बब्रवङांब्र, धर्भषिौा इषशांगव। ख्रिण किरण हऐलांब cब्र हांब्रां । (cनांशांज) पांदेड व पांऐ७ वा कांदबां वृत्र cषणांदेtछ : श्रृंप्र पदेन cषण, बां पणिरब छांक, छछूक cनांकूटणब्रटे cजांटक । (पाइ दांदेड न वांदेड वा कोरबा इंग्र cषणादेरल) ॥