পাতা:প্রবাসী (ঊনত্রিংশ ভাগ, দ্বিতীয় খণ্ড).djvu/৫৪৭

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م859b প্রবাসী-মাধ, తిe [२>* छां★, ३ब १७ गरुडे पाकिरउन । थांबाब्र कांशब७ हिन ‘ण७ गाहे? - निइनकांब निद्रांनश cवकेिवणारकहे cर्षीछादेशा विनषणङ्कण कब्र छैiशtनद्र १५। बाबाषांकि वृ? वछ .कांशत्र७ श्णि ना। बिब्जि ८ग३बछ cग३षाप्नहे ७क$1‘निd' फूरिडः षांकिब्र जांशांब्र षांखांद्रक ●थzकणब्रटबद्ध cनांtछैग्न नब्रिवटर्ड किठिण नछां ७ eिअर्नेौरख छब्रादेष्ठ षांकिउ । cनचनैौबtब्रज क्क जशांगक क्षन नांघांम् चषडकौ कब्रिज्ञ चांबूंखि कन्निब पादेरखन, विऋिजब्र षडिांश, भाडांद्र नां७ङ्ग, ऍऑशम्र विविष छविवांक छलव्हिज बैंक हरेबाँ वादेख । वकै बांधियांबाख डांह$ cनथिब्रां गश्ताद्वैष्णब्र भ८षा DDD DH BBD DD BB BBDDu BBB नशचल्छ cष ५क चबूना चदनत्र, जांशष्क दिध्खि गरूट्नब्र गवान गार्षक कब्रिश फूणिउ कथप्न cण्दकब्र उदण गए८षांtनं उनंहांब्र प्रधिडे करéब्र छांनी जर्चौरड, कषट्नां cदकिन खेन्न ह*ां५ नैम्निाबेला उांशत्र बूजकूलन छब्रक्रकटन कषटनां बl ७कÉ दौब्र-व्रणांज्रक बाघ चखिनtइब्र প্রাসনে । विsिज चाकर्वेन कब्रिाउ भक्ङि न उर्दू बूक्रिक। पषन क्लषडक cशन बिन्निजद्र cकोङ्कक गाखांcर्ण भाrजापान, कि उषन अक्बाप्त कैठे रहेश वनिता पाकिङ । कणज झछद्र गत्र जन दैर्षिब्र ब्रांडाङ्ग बारित्र হইবা বিচিত্র বন্ধুদের বলিত,-“চ’, কিছু খেয়ে জালি, জাভ এক গোল চ" ক্লাশের আর সকলেই কোনन-८कांभ नेिन जीब्र ७ चांउिश चैौकब्र कब्रिग्नांदइ-कट्ब्र मारे बूरुि । कब्रन बूरुि.cवल बूकिरउ नांब्रिड विष्ठिरजब «रे निब्रष-कब्र मिमज५ बडू औफिथtनांक्ङि नष्ठ, ठांशत्र शंडिकष्ठ-अन्एख । विछिब छांश्खि जरू८ण जोइक जब इणइन। चारह, जाइक cद भइन कि कछि पच्नेछ' कब्रिटङ इब उ1'cन बांटन । , cन छांश्छि जकणटकरे उांशन्न चरर्ष बा गांभरर्षी बनेफूठ कब्रिब ब्राषिरउ । वृश्रिक स्खि ८क किहूरछहे यत्र भानोरेष्ठ गाब्रिटउझ्नि ना । घूफिर्कोटक cगैो५ षडझरेरठ cषवभ रज्ज अक्छ्रे छैन क्tिउ श्व चाषाङ्ग गवद्गमङ ५कप्ले छिन७ cष आी अंशचम वृक्रिक कप्न जानिज विछिज ८७षभि उशत्र नाक कषम० भिषॆखॆ काश्म७ नििश् शरीiश्ाक्दष वि ष्ट्रविड । توي पनि कषटनां खांशांब्र ●यउि खेदांनौनखांब छांव ८बथों बाँदेख छषबरे किच्च चणाका पाकिउ उाइब्र aथडि छ्उँौङ्ग वृी । किरू विछिटबब्र णकण ejकांब्र ८कौनंज वजहै विकल शरैरङ जांत्रिण छोशांब्र चखब्र c:कॉष ७ cजटक्द्र ऐ६कüछांद्र उछदे छब्रिदां छेfठेण । छिक्टिनब्र हृाँsछ जबङ्ग cगनिन करणध्वन्न cङङनांब्र बाजांनीघ्र नैiफ़ादेवाँ इऐछन्नब्र ऋषा ह*ां९ विक्त्र उ# बांषिब्रां ॐण । दिग्निरजब कडप uऐ cर, छब्रछकर्षक बर्डवान नक गमजांच ‘जलि कविप्रा विनिकारक इहे छूफिहज अफ़ांदेब्र क्रिड न गब्रिहण चांत्र प्रक नारे। गरशाउँौछ cनवाक्कैौदङ उक्ति, cनकरनकैब्र मांटम . चणना नॉइशांथtब्र छडि, निकृछसि, बांझछख्,ि श्रृंछिडडि हेडrांग्निना छांटन नद्भिद्रां चांबङ्गां चांग्न भाषा छूनिहज शांत्रिरङहि नः।। ८क्र+ब cगषी कब्रिाउ श्रेटन ७ छख्द्रि *ष cब्रांश कब्रिहउ श्रेष्व। ' दूषि वणिरङ छांच डङिद्ध *ष दक कब्रिहण ८नक्ट्दि gनर्थ- . . cनवाब कलि७ cनाग गरेबाइ । जाशप्क्द्र अर्कच बैौबांरणांग्न छैनङ्ग८णरथब्र चांगछ cकांटनीं विन्न दां गन्कन फेमछड हरेक चांटक्क, धमबिख्द्र ७कफै छांटष eधcनांविरू इदेशः इहेषण्न किक्व चगरिरहेका नफिय। नैौछ ब्रांच দি লোক চলিতে চৰিতে তাঙ্কয়ে প্রতি কৃষ্ট ইঞ্চি, कबिाँcक्छनिद्रा करेरउश्णि cणक्रिक उशष्वत्र निण्णाटकक’ मृड हिन न । क्यय उर्क वांग्निह बबन चबंझछ जानिण;. क्षम खिाक्व इङि इन्दिा करीब परिक्रे उच्.... बांजि क्रांजॉरेंड बांनित्र : ७यनेि ७कचैौं खेक चरङ्गक कूकि इ*ो६ ‘जटिनांकांब्र' पणिक्क नीणि क्किं कणिण । किरिब ७ अिङ्काउन्द्र क्निज 'भोस्रण' । किछ कि उकङ्ग ऎतत्र चांद्र ८कन कd करश्नांशे ७षश् उरर्कद्र cगदेककरे जबडि ह्या । সাধারণ চোখে দেখিতে গেলে কোঙ্গা জির্কের শেন कॉर्डीछे ८ष करिब cषष कब्रिzछ कांटक, cन-देवकै कबिक खउँौद्रबम एक-चर्षी६ ७मन कक्ष cक कतििछ शशत्र बवांच पिणच क्ब्रिां ऐf$रङ नॉछह बादे। क्रिड करणरजत्र विक्ष्ठि भरे बूबकक्इ विक्षािंतिरक गल्नजङ्ग