পাতা:প্রবাসী (ঊনত্রিংশ ভাগ, দ্বিতীয় খণ্ড).djvu/৭৬

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১ম সংখ্যা । যুগগুরু রামমোহন (లి". छषनकांब्र निटन uरै कांटज वैiहांब्रां हांड निब्रांदइन डांशप्नब विक्टरु eडिकूनड cष रूङ अंबण ७ांश ७षन दूवा कfन । ॐाबा फेङइनष्णब्रहे चम । अहे विषद কবীরের সম্বন্ধে একটি চমৎকার গল্প আছে — कशैब्र पथन श्लूि-जूनणभांप्वद्र बिनाबद्ध कथा वनिटउहिनन डथन 5ांहांब्र छैगंब यूनजनांन बूझiब्रl ७ जांच* श्रृंखिrठद्वाँ नबांबछांटब cकनिब्रl sátणम। भूत्रांड बटणन हिन्यूबांबौद्र नtब बिनाईटङ जिब्रां कशैब्र पूनजबान षट्रूि बांब्रिज । हिन्यूब्रां वध्णन षषtबद्र भूरथ नांवबांड हषांद्र उजरांप्नद्र नांटम हिन्यूबई ब्रनांडरन cत्रन। बधन नबद्र बांगलांह cनकबब्र *ीह cजांनॅी कांनॆीब्र कांटछ नक८ब्र जॉनिटजब । भूत्रा ● श्रसिद्ध छैखरग्न बांमध्येizइब्र कां८झ करौौ८ब्रङ्ग विग्नाटक कब्रिग्नांम कब्रिटजब ! बांक=ांटहब्र cजाँक जॉनिग्नां करौौब्रटक प्रब्रयांtब्र जड़ेब्रf tनंज ॥ ठषबरूiब्र क्रेिटब जडिबूखटजङ्ग ●कÉ ब्लांब, अछिाषांशंकांग्रैौटाङ्ग बक$ cषग्न झांम नि#िहे शांकिठ ।। 4कई cशङ्गाँ छांद्रजांब्र भूत्रा ७ श्रृंखिडरगड़ aकज जवहांब cपथिब्रॉ करौौद्ध छैरेक:चtब्र हांछ कब्रिछ छátजन। वांश्नांइ aब्रण जननष्ठ वावशांप्ब्र अक विब्रख हक़ेब्रॉ बिछांग कब्रिटजन-**ङ्गनं जांकब्रtनंब्र अर्ष कि * कगैब्र बनिtजन-“जांभांटक क्रमा कब्रिtवन किङ थांब चांभांब वक छब्रम ह*ब्रांtइ । जांभि शांहाँ 4खकांण कोहिब्राँ अॉनिष्ठकि जांज टांहां* निक इश्ब्रांप्इ cनषिलांब । fकांनांक अकई छूण शश्ब्रांप्इ

  • ?कांनांtश cषांख्नेौ श्रजठि tहाँ अङ्गे” । गंजनांइ. शनिटणन-कषाके भूनिब्र वज " कदौब्र रूहिट्जन-जांत्रि 5ांश्ब्रिांझ्णिांश हिन्यू ७ भूनजञांनटक ८थ८ब ७ tबजौtङ उनषांप्नब्र छब्रचंडरण ब्रिजांब दांब्र कि बां ! नकटलरै कजिटलन पठाइ जनखद । बांज cमथिलांत्र डांश जड़ब हरेब्रांदइ । ज८थटबई दनि ठांहांब्रां चांज 4शांtब बेिजिटठ श्रृंiद्विग्नाँ थांटक, छट्व ८&थ८भ बिजि८ड *ांब्रt बां८ब्राँ नहज ॥ जांब्र cप्ठांत्रांब्र निर्हांनtनग्न बौद्दछरै शकेि छांटमब्र बिजन नखब इग्न, ठाद विश्वभछिब्र निश्हांनटबद्ध नैौछ कि बांब्र७ &यनंच हांब विजिटर नt ? जांब जनखषक अछद cपथिब्रां जांथांब्र छब्रन हैब्रां८छ, भटन बटन बांहाँ छांहिब्रां जांनिम्नांझि, छांहांझे जांछ aवष्ठ)क cनषिजांब-ज्राव ॐॉब्र निश्हांनबङtण बाँ ह*ब्रl cडांबांद्र बौफ़ ●ई भिजब शब्लैब्रांtइ ॥ डॉई शनिष्ठहिणांत्र-जक३ fक हरेद्रांप्इ ८कवण fकांबांब्र अकई छूण हरॅग्नां निंब्रां८इ ॥*

शांश्चार कषाः बूकिtउ नांब्रिग्न जबिठ ह*ब्रां धेष९ शश कब्रिग्रां कबैौब्रप्क छ९क*ां९ विक्रॉब्र क्टिणव । মধ্যযুগে নানাবিধ সাধনার স্বসঙ্গতিকে মনে প্রাণে कॉमन कब्रिबांटाइन ५धन छूहे ल८ङब्र चशिक वशंशूक्ष সাধকদের বাণী পাইয়াছি। সম্ভব হইলে, দেখাইতে পারিতাম তাহায়ের প্রত্যেকের অভরের সাধনাটি পরিপূর্ণ হইয়াছে রামমোহনের সাধনাতে। তেমন সময় ও স্থযোগ ५षन नारे । उहे थशमउः कवैौबबी, शमूर्खौ ७ ब्रच्चदशैब्र বাণী হইতেই জাজ কিছু কিছু দেখাইতে চেষ্টা করিব। उड नांमकबैौश्च श्कूि-जूननमानहरू विनाश्वांब cछडे ग# জনবিদিত—বিশেষতঃ দুরোপীয় পণ্ডিতরাও তাহ উত্তমक्ल८* लिशिब्रिां८झ्न ! ! কবীর বলিতেছেন– “ कङ वां भांटा शब्रिग्न दूकाश्णांब कठ या कैक्ज्ञि वृकtश्णांध हिनू cनवप्नशैहे नूब थाब्र थूनणयांनe कांबe चांगन रश्ध्ठ छांद्र मां । fক তনে মনাৱে পাৰ গরি কি গুনে মনারে রোয় । " श्रितू नूtछ cजब ठां छूर्क न कiइ tशांद्र ॥ cषांश बनि बनविtरहे बांन कtइन छrत जाब नव मूलूक कांहांड ? ठौर्ष-मूर्डिप्ठरे पनि बांश निनांग कदब्रव अत वांश्tिब्रह अन९एक দেখে কে ? - জো খোদায় মসঙ্গি বসন্তু হৈ ঔর মুলুক কেহি কেৱ । ठौबथ बूबठ ब्रांबविवांनी बांशद्ध रूटब cकt cरब1 ॥ श्चूिब रिन्गूबांबीcवविजांब, भूगलबांप्नङ्ग भूमणबांबौ cपनिजांब, हांग्र, इशबt cरूहरे गष गात्र नांश् । जtद्र शनकृङ्ग ब्रांश् ब नाझे ॥ श्म्इिकौश्क्रिांत्रे cषषि छूर्कम की ड्रड्रकारे ॥ সবাই বিধিৰ্যস্থার বেড়া ( creed ) রচিয় নিজ নিজ সম্প্রদায়কে নিরাপদ করিতে চায়, শেষে সেই সঙ্কীর্ণउॉ८ठहें शर्व भांब्रां बांब्र । ठाँदे रूबैौब्र दtणन- . tकरङ बिलांभ cवग्नl cचंरब cकर्षि cबक्लांछेiहै। cकङरक थांब्र । ठिब লোক সংশয়ের মধ্যে রছিল পড়িয়া জাৰি কাছাকে কি বুঝাইৰ ? বেহু জীমূৰী খেত কো ৰেহ্লাহী খেত খায় । উীনলোক সংশয় পাড়ী মৈ কাছি কৰে। সমুদায় ॥ এই প্রত্যেকটি কথা আমরা রামমোহনের মধ্যে পাই, রামমোহনের মতই কবীর তীর্থে তীর্থে ঘুরিয়া, দেখিলেন ; সত্যকে পাইলেন না। শাস্ত্রের জ্ঞান কবীরের श्णि ना उबू नारज्ञब्र दकन? cष रूड कfन ठांश বেশ বুঝিয়াছিলেন। তাই কবীর বলেন— ठौtर्षcठ1cकरुण अण, छांशां८ठ किङ्करे हक्क बl; cन जांत्रि ब्रांन कब्रिञ्चl cगषिब्रांहि । बठिञोछणि cडl छर्छ, ८कiन कषांझे वटल बl, cन जांवि छांकिकt cवर्षिब्रांझि । नूद्रtन कूब्रांब cड ८कनण कथt cन जांवि पाकेब्र गर्थी नद्रांश्छ1 cनषिद्राझ् ि। कदौञ्च कtद सबू अठाक DDDD DBSBD DD C DB C DBBBB BB BB ८ाशिष्वiद्द् ि॥ खैीविषं cशॆ cखं लब शंभॊटॆड् ८शींशवशॆ का षाङ्कोंझ cधि ॥ ●खिबाँ लकण cछ जछ *ह cवांटण बहि tवांणांब्र cक्ष! ॥ नूद्रां4 कूब्रांन गष बांठ tइ ब्रां पठेक गडगl cषांज cनषl ॥ चकूछब की बांख करीब्र कtई वह जब tर कू?ी cनोण cनधीं ॥ cवदनम्र शूबी चानिरजन ऋछि डिनि वैiषिtजन बननं वैiषब ¢र किङ्घरखश् दांब्र वा इक्लिांब ।।