পাতা:প্রবাসী (ঊনত্রিংশ ভাগ, দ্বিতীয় খণ্ড).djvu/৭৯

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ëè తీt-fశ, రిet [ ૨રૂમ જાન, ૨f te দাজুর শিষ্য देहि *तिक८ब्र लिथिब्रां८छ्न विनि बांछि, कूल, जांश्च व4ीबबटक निषTा बांध कजिब्रांटहब, cनरे बांगू शब्रोण जांनांब्र यनिक नवृखङ्ग, ॐांहांtरू जांबांद्र थ*ांव । जिनि जाडि कूण चक्र च{थांबब कप्र विषm नांव ध्र कांबू कब्रांज यॉनक्ष गएखक छांश् िcनांब य*ांव ह ॥ ( इश्व्यङ्गवांन, खङ्ग खेनtननं जडेक } जांक्षाद्ब्र१ cणi८ङ्गब्र बिङ्गखुज्ठांद्म खंब शौन्निब्र षङ ख्रिनेि। বর্ণাশ্রম প্রভূতির উপৰ আঘাত করিতে ভীত হন নাই। • दषन शिन्नू भूगणनाव इ३णक सभढ़ी कब्रिब्रां वब्रिटलक्ष्णि उषन बांबू इब्रांप्णब्र छनrप्रश्नं वनदिक ध्व्वन कबिंब्रां बलांनिछ इरेण । शग्लब वtजन, ●दे गइरे श्रद्धबळकब्र गचयशांच्च पणिष्ठाँ बनिक एश्ल । बाबू कब्बाण महर्षिनि यकके कनकि कनछि ६ष गष थकि ॥ कश् िछ्व्वब्र नएष यनिक ब्रह नयनाय नब्रजञ्चकौ ॥ (अॅ) बांबू cनद्रष1 गब्रिrख्व वा । विडूखि जांनाश्रख्य न । ठिणक वांण थांकन कब्रिrखन न । त्रूनणभांबी गकछि छान कāिcणब, हिन्यूब जकी4●ांड बांझ कब्रि८ठन बां । छनबाबी छोtव न३ि, विकृछि जनांtव नश्ि ♚की बांण भाटेब बहि ॥ फूबाको cथ्1cपनि आफ्नैौ रियूनकी हकहाङ्की-“ (इणवषर्बी कुङ कानू वद्रोण eच्च िनक्न्त्रो) हेशब्र ७कलज्र ब९णञ्च श्रृंटङ्ग गोगर्छौङ्कङ •इaषI। গ্রন্থেও দেখি এই মগুণী খুব বিশুদ্ধ ছিল, জাজ ও ইহাদের মধ্যে পৌত্তলিকতা প্রচলিত হইতে পারে নাই। ইহাদের উত্তরাধী নামে শাখা অল্প কিছুদিন পূৰ্ব্বে একটু-আধটু মূর্তিপূজা প্রবর্তিত করিতে চাছে,কিন্তু বিরক্ত, নাগা প্রভৃতি দলের শধা পাওয়ায় তাহা ঘটিয়া উঠিতে পারে নাই। ७थनe ब्रच्छबजैौब्र नाथारउ श्लूि-भूननमांन निर्विलदष যিনি সবচেয়ে বড় সাধক হন তিনি সকলের নেতৃপদে নিৰ্ব্বাচিত হন । কবীরের ছিল যাহা আপন জীবনের সাধনা এবং यांश कबीब्र'cकवण बकू-बाकब करबक्छनरक जहेब गांथना কৱিতেন দ্বাদ তাছাই লইয়া একটি সাধনার মওলী তৈয়ার कब्रिzvन अवर कब्राँ अप्ठांकौ शब्रिब्रां cगहे चांम* cष নির্শ্বলভাৰে আজিও চলিয়া আলিতেছে সে-কথা জাজ ब्रांभ८भाङ्टनब्र य७णैौनष्ठ गांशनांब्र वज्रयांर्षिकौब्र निटन इब्रौञ्च । देहाब्रां७ जाष्ठि-नरडि, ८वव८मदौ, दार्थ चांछांब्र निब्रभ, बांश् छिरू, बडॐबांगानि, शूक्ष e नाद्रेौब्र चषिकांब्र পার্থক্য, জাতিতে জাতিতে বৈষম্য প্রভৃতি মানিতেন না। স্বায়ুর শিষ্য রজবের সময় এই জার্শটি আরও ভাৰ ७ गाँषनांब्र वैश्व८र्षी छब्रिब्राँ GÉन । ब्रजव हिटणन छख e छांबूक जांशग , सक टेबब्रांगा छैग्न नषं नञ्च । ठाई cनश८क कुषां दह छ्थं निबों औबन८क लष्क कब्रिड्रां cष गांथनां डांश তিনি গ্রহণ করিতে পারিলেন না। রজৰ বলিলেন— वtनद्र ऋषा ब्रहिज चनंब्रां५, खांहांइ बांनांण जां गांदेब्रां हांप्छब्र कां८ह cबछांबैौ cनह८क गांश्ब्रां पठांहांब ॐणब्र कोणकोछ cकम ? •ल्लीभांछ *८ब्रह गरम कभक्लीब्र हांब्रिब्रl निtजब बगहांछ tइtणzक शब्रेिब्र! dवांश, १७ cवन फॉरे । cषष्ठांब cरूदन मांtाद्र ऋषद्र क्रिक कारिब्र छां८ष ‘हरेंज कि ?" नंटर्डङ्ग बटशj ब्रहिल छब्रांण णांण, छांब्र बांत्रांज ब1श्रृंtèछ श्रtéब्र छं★i¢ब्र cकवण जांषांड कब्रिब्रॉ जांछ कि ? cगहरक कनिष्ठl cङबनेि निकल गांक्षवाँ । cरु ब्रबद, ८कन बधब कब्र ? उनंबांन जनहांच्च cमहथांमि८क c७ांबांब्र जांशबांब्र गझांन्न कब्रिध्नl cथ cखांबांब्र हां८ङ किब्रांटक्कन खांब छ°ध जकांब्रन छै९*ीक्लन न कब्रिब्रां छांहांटक ८चटबब्र সজ্জিত প্রতিপালন কয় । कनि cपuह न भांधि नाक बांबँौ शैछ गर्न छब्रांज ॥ সে রজৰ কভু কহিতে প্রাণকু প্রেমপ্রতিপাল । সাধনার জন্ত পূর্ণভাবে আমাদেৰ ভিতরকার সব শক্তি ও সব সম্ভাবনাকে বিকশিত কৰিয়া তুলিতে হইবে, ইহাই ছিল রজবের মত । এক অংশের পোষণের নিমিত্ত অন্ত अ९१एक सकाँहेब नडे कब्र कथ८मा गांषनां नरश् । डांडे ब्रच्छद कश्छिलन वहाँ बिनिवकेi छांज छबू ठांश cनांद१ कब्रिtठ त्रिध्t षषि cकर cशौक्रवाक दष कब्रिण ठाशां७ छ कब्र हरेण नl ठांश! हठा कब्रl इश्ण, ईहाँ किङ्ग पई बtए ! ७ cषब छांडेटक बांब्रिक्कां छांडेटक cणांबन कब्रl, 4ंश् झषाँ शृिङ्गl gक्षिणि बांशङ्गl aङ्काशं विद्धि बडोख इ*षषि कब्रिज्राम ॥ बांष विक्लॉजांकि अख छू♚-वकs वांछ tरक चखिनांजी कब्रि८ङ चछ कोक्लोसजिद्दक बोबिच्न थो७ब्रोङ्ग–cख्वनि औक्८नङ्ग कङक्खणि ●ांबएक बांब्रिब्रां कृ३-4काँक्न विप्लव छांबद्दक नखिलांजी कब्रांब cश गांवब-वजिहांद्रो वॉरे cनटे गांषनांटक । घञ्च जोनिं बब्लनं* बtष बांखक क्षन्त्रत्र ब ¢कांम्न ! चाङ्गे कूे इठि चाश् ? coriं ग्रशरं इष् इष catह्म ॥ रुक्कै अग्नि रुक्क विजारेक ४छ cण कोष क्जिोक्लौ । छांद भांब्रि छांदइँ जीव गांषनकौ बजिलाबैौ ॥ जाच्यवांब्रिक cखनवि८छक इक्लिब्रां ध्वजौटङ नव नांदबा इनबद्ध कब्रिव्रl tवsिtजाद्र बांद्रां गद्रिभूखिांब नांषबाब्र उनषांनएक उजवा कब्रिटन कि छनबरे वा इहेछ । किरू 4 cद cबषिrडदि “श्नूिबांबौद्र मध्षाएँ श्चूि भूी, यूनणवाबीब्र वरशश् चूनणबान भूगै, ७८ब ब्रव्छद cनरे cबबबब्र cष अक, छैोब्र cडl 4ले इटब्रद्र भट्षा ८कोब cलनबूकि गोरे । श्चूिनखि हिन्यूक्षूनी छूद्रक फूबकौ नाडि । बण्यष जॉनिक यक tर छिनप्क इनूJ बाई ॥ उषन ब्रष्यवाक नकtण छिलांग कब्रिण-“छूनि कि उtव गांधवांद्र बांब लांप बडे कब्रिव्र नृविरोcड cकवण अककिनाज गष बांषिटल झां७ ?” ब्रणबत कशिष्णन-"व्रत ८ख बांपरिक्लाप्नब नकडिहे