পাতা:প্রবাসী (ঊনত্রিংশ ভাগ, দ্বিতীয় খণ্ড).djvu/৮০

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১ম সংখ্যা ? যুগগুরু রামমোহন । &4 इ३ण। नव बांछ1 बांबिब्रl *क बांक्र शूषिणांत्र मांज । शृषिचौrठ षऊ शांकूष ठछ सर्व ॥ नकटजब्र बिंछिब्रडांटक नजौ ७ इनञष्ठि बांब 4क कब्रिद्रां बक शब्रिभू4 मांषनांब्र दितिज cर्नानtर्षी श्मब्र ঐক্যকে গড়িয়া তোলা । अनष्ठ cर्गब्रां★ी जक्र cणांक ( छन म९षjांब्र छांन ॐांब्र अड़ेब्रकभरे झिण)-4हे cछौब्रांनॆ जक्र नक्थनांग्र ब्र5नां कब्रिब्रl cनझे विचखब्र छत्रप्ऊ ६बठिंबा ब्रक्रन कब्रिटणन ॥ छटमब्र छानब्र विफ्रेिंजडt घांब्राँ निभिज श्रांबंबब शोषत्र! नििख! &वtā श्रृण ॥ cछौब्रांनी जक मचथमां कब्रेि विनडद्ध cनांग्र । ব্লুজৰ ৰৈচিত্র রচিয়া জলজন বৈচিত্র হোয় ॥ किड़ डtइ! मtरूख नकद्दलङ्ग असू शांश्वनी लईब्रां ॐहे विश्वभग्न अक5 अझ्tऽयशृंछि ●क ब८कब्र छब्रtणंब्र शिtक छजिब्रांद्वह । नtबांBटनब्र गांषनांब विन्नू दिन्यू जश्ब्रां गांधन ब्रध्नब्र निबू इश्यांदइ ॥ ५३ दिन्मूठनि नां भिजिटल य८ठारक छकांहेब्रा बभ९मग्न अक*ि विब्रtछे मद्रष्ट्रभि इ३ठ अङ्गि । अिप्टक सूत्री सििद्दश्व 52क बक्री मिणि छiग्न । . बृंश्च यू१च क्षिणि ब्रण मेि' ंश् बृक्ष! ब्रूतः। बझ् खांघ्रि ॥ किद्ध झांब्रिनिटक उशन cपांब्र जखांब विद्भकडl, ठांब्र भtषा अरै गठा कब्रञ्चन वृतिरब ? ठबू ब्रव्धtवब्र छद्र नां३ । ठिनि दणिप्लनपूर्श्व पूर्ण बाब्रवांब्र नष्ठाश् भिषाiएक जांषाङ कबिब्रां बध्नी श्ब्रांप्रु । DD DDDS DBB DDg KS BB BBBBBD DDBB BBBB झईबांब नद्वह् ॥ সাঁচ সজা দেবমুঠকু জুগি জুখি বারংবার। ब्रबजय जॉन ब कौfछ८ब्र एछt८ञ cकब्र न कांब्र ॥ मधकांग्र ७ मायक्रांब्रिङठांड मकौ4 थांथzग्न न लूकोज़ेब्रां बांशंद्र गप्ठाब छैचूक नमब्रटकथ्ञ निर्डब्रथic१ जांप्न डांशंबाले शैब्र । ७३ खभङ ठांशप्नब नॉषनांब मशब्रङ्गवि, अथोप्न यठिभूझण्डैश् डांडांबl মনে করে যে প্রভুর জন্ত তারা লড়িতেছে তাই সদাই প্রভুর সাথে गां८थं जां८इ ॥ cखक श्रृंथ छटेस नई"ौ मठ, बिब्रडग्न थॉर्ण ! ब्रव्छव ब्रrह णबांधं खङ्ग यूरब्रl खख tषमांब ॥ अरे शैrब्रबाडे नूठन ●अ९rरू ऋड कब्रिएव । शैब्र बिबt ** अंiषबांब्र खत्र९ ब्रक्लिष्ठ हड़ेब्रt३ üüzङ *ां८द्र नt ॥ cह ब्रव्छब cकांछि कांगूक्रद विजिटलe ठांहांब्री ठांशांप्मब्र णकौ{ नं७ौ शंप्लॉरेञ्चाँ dंक *ौ वांश्tिब्र १ांडे८ठ नांइन क८ब्र बाँ ॥ रब रिब जश्नांब कू बिबsा कशै न बांब ।। ब्रबख कांब्रङ्ग ८कां5 बिलि खांहब्र षट्ब्र न *ांब्र যে সত্যের জন্ত বীরের প্রাণ দিতে পারে সে সত্য কখনো ক্ষুদ্র ह*८ण छरल बी । छांडे ब्रखटबद्ध नङ७ हिल विलांज ॥ *णव ग८डाब नरक्र बर्षि cवष्ण छटबड़े छांइ जठा बश्ट्जि डांहां भिषा । ब्रव्छद *ई नङ, कषts वणिइ किन ॥ sषन काहे छूहे इ७ छोड़े ब्रहे ह७ ।” সৰ সাঁচ মিলে লো সাঁচ হৈ স্থা মিলে সো ফুট । खत्र ब्रखश् च iंौ श्री खt्च द्विषि ७ीरैश्च क्ळै ॥ কুরাণ পুরাণ বেদশাস্ত্র রজব মানিতেন না, তিনি cर ब्रजयर, वइवांझे जब ८बम जांब्र अविज श्रृंडहे कूब्रां* । नखिठ ● कांबौब्राँ कडकeणि काँचंज्ञनज छखब्रट्कड़े जषिण खञ९ अtन कāिब्रl पार्ष रहेछाप्छन ७ वार्ष कहिउद्दछन। चिप्लोङ इलेज माछ । ७८त्व ब्रवत्रक सक कांत्रज कि ग्रकृिषि cनथांय्य छांश्छिt cवर्ष निष्ठाएँ Ծիաl աի lo, `ब्रव्छष बशषt cयन नर कूण अॉशभ कूबt१ ॥ *ांसि छ कोछौ tषषरेक्ल झकङब्र झूविद्र! जांब a श्रृंडे *ीछब्र ६इ गईंौ cवखां क८ब्र वथॉन ॥ ब्रव्छव कॉनअ कjाँ witछे बेिडहि डांछt छtन नtषरकङ्ग जetब्रब्र कांग्रं८ज्ञ यां८गंब्र अक८ब्र cजथl cष *ांश ठहाँ cटl cकश् •८छ् न । बृब्रटभङ्ग अबौङ डॅझांब्र! तनिtङई *ांग्र न ॥ जांधन झtब्र की अश्छब्र कां★छ थांच बकञ्च अiिfई, স্নহ পুস্তক কোট্ট বিল বঁাচে মর্থ শব্দ ন স্বনাfই ॥ cकां त्रांबद भिशिग्नl cव विब्रां? भांबद छ*९ (अभांe) ठांशां८ठ fद ब्रॉछे बनख cदश कशमल कब्रिएट८इ i खiहि८ब्रङ्ग वांशु अॉ८जां निडtश्ब्रl निtण भब्रभेौ ङांब भब्रभ श्रृंiब्र । &यt१ ८कtा अभी७ cत्र रुज८क बनळु ८वन ॥ बांश्द्रt cब्रांड बूकtब्रह्क cडमी गा?ष ८छन ॥ cश् श्न्नूि, tश् भूमणभांनcन* छौपद्ध नांश्च भक्लिग्रl cमर्थ । क्षिविभिtण BD DDDDH BBBS BBBB DDD DDD BBCYLSD DDD छेüzस ॥ ७क घृङ कांश८छ युङ जक८ब्र cग नाज्ञ डॉहांब्र शंiáक विtण অনেক। ঘটে ঘটে যে প্রাণময় বেদ, হে রজব ভtছা দেখ পড়িয়া । প্রাণ গুপ্তক দেখহু হিন্দু মুসলমান। সৰমে বিদ্য একছি পটtঢ় স্ন পণ্ডিতপ্ৰt৭ ॥ कांशङ भूठ71 अकनॐ *ां*क भिरण जानक । বেদ বট ঘট এাণময়ী কুজ্জল ধাচকে দেখ ॥ এই মহাসভ্য ধাহাদের হৃদয়ে আসিয়াছে তাহদের, সকলে যদি সাধনার ভ্রাতৃত্বে মিলিতে না পারেন, তবে সকলেরই সাধনা ছৰ্ব্বল হইয় পড়ে। তাই তাহারাও তখন নানা মতের নানা সম্প্রদায়ের মধ্য হইতে এই এক ভাবের ভাবুকদের লইয়া একটি সত্যসাধনার মণ্ডলী রচনা করিতে চাহিয়াছিলেন। একেল কাহারও হৃদয়ে যদি এই প্রেম আসিয়া থাকে তবে তাহা तथू रjर्ष हे इश्एव । कांब्र१ अट्ठाका दिन्यूब नएषा ८ष निबूब छांक জাসিয়াছে। সেই বিরহী বিলুগুলি যদি এক এক সিন্ধুর দিকে চলে, . তৰে কি তাহারা প্রতোকেই ব্যর্থ হইবে না ? তাই সিন্ধুfবরী একটি ৰিজু অপর সকল ধিন্দুকে ডাকে কারণ সব ধিন্দু একত্র হটতে পাব্লিলেই সংযোগে একটি ধtaায় গতি মিলিতে পারে। একেল cकांन विन्मू cनॅीsि८डड़े °rizब्र न। भांरकब बावथांन ७ गथड़े ठाँब्र नव नखि नव जीवनक छकांश्छ। गांब्रिtव । जौबांब नर विमू दक् िअकज হইতে পারে তবে সেই ব্যবধানৰে, সেই পথকে নিজেদের পরিপূর্ণতায় প্লাবিত করিয়া দিতে পারে। ৰে প্ৰভু তোমার স্বযুষ্টেট তোমার দরশ মেলে—বিলুবিন্দু সাধন মিলয় আজ হরিসাগর চলিয়াছে। aझे नांषनांब्र खोदछ थांबt* cड1 बौदछ भन। । ५३:बांध्र घांब न कब्रिग्रां त्रुङ त्रबांग्न घांन कब्रिटण जोछ कि ? éaछि ज८कजौ पार्षभहानिश्वविब्रही क्लि ८हांग्न ॥ दूश्म भूकाटेब दूब८क भखि विरेण नःtबाज़ ॥ जटकण बूश्म गहरेक नईौ श्ध्ष गइष जि९cबांब ।। ग६थ उद्ध छद्ब्र अकcहांग्न धब्बन जग्रा अछू cष्ठांब ॥ বুংঙ্গ ৰূংঘ সাধৰ মিল ছরি সাগর জাfং । बान अरण बी श्रृंह छ भूब्रन न६न गबां३ि ॥ 4हे cष नांदकरनब्र ग९नत्र केहांई cछ गडा टौर्ष ॥ ४षांटन हांन *वर कोण चडिकम कब्रिव्रां गरु षांच्चाँ जांनिम्न ब्रिणिछ ह*८ड श्रृंitब्र ॥ पूजबूनद्र थांब्रां 4षोप्न निणिब्रा बखरीन गरण गन पहिंदी छजिब्रांदइ ॥