পাতা:বিশ্বকোষ চতুর্দশ খণ্ড.djvu/২০০

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勾裔牛 o + * :- s aso } ia : ংস্থান •. - mommuw ● माहे । ईश् पनि श्ब्रि श्ब्ल, कोश्। श्श्रण अरुङ्ग cक ! यई थtन्नग्न भौभाश्ग कश्रिड भविरल अकूs* शैबन ७ भद्र१) uहे ठिामग्नहे भैौभांश्न। इहेब्र शांद्रd *ाञ्च वजिब्रांtछ्ज्ञ, “मां★९ इखि न श्छएङ' भांचा कांशय्क७ भारब्रम म 4द१ मिरज७ मtब्रन ; न। कोझ१“बङ्गण’ मामक एकान श्र७त्न श्रृंमार्थी माहे १ ८य घाँबादक जांभब्रा भब्र१ नाट्य जडिश्उि कब्रिग्न थाकि, ठाशङ्ग ७वद्धि । একটু বিশেষরূপে লক্ষ্য রাৰিলে সহজেই বুণ্ডুিগান্ধ স্বায় ८,शृङ्गं किं ? कङकखणि कृ५, कपड़े ७ निष् ॰वि चषङ्गव। अरुण कब्रिक्री ५को चरबरी (शृशत्रि) निद्राषकब्रिप्ण, अण वायू s वृडिका आश्ञ१ कदिब्र अछ यकी अबब्रे (घाँ नि) • अडङ कब्रिrण, बुिष्ठि, चण ७ दौण ५कछ इहेण, छांशष्ठ জছুর জম্মিল, এতার জন্মের হুচনাই করা হইল। কারণ नूरुं शृप्रबक्लश क्ष्णि मा। ह१, कां* द ब्रच्छ, गरुtषांcशरे छाशब्र उ९ेखि वा बिकाश्व पनि चौकात्र कब्र झरेरङ नाष्ट्रङ्ग। , डाय मग्न १ cव किं ? फांश अकृथांबम कब्रिएङ cनएन **टेहे दूष। वाहेष्व.cर जे नक्ण नषादर्धक वथाठीब गश्रदारभद्र नद्र दिब्रां ऊँौद्र कबशष्यब्र माम भङ्ग१ । cव कछक४णि छू१, कां* e রঙ্গ, প্রভৃত্তি অবয়ব একত্র কন্ধিয় একটা অবয়বী (গৃহাদি ), निर्णी १ कब्रिहण, जण, बाबू ७ यूखिक भांश्ब्रन कब्रिवृt झछ একটা অবয়ৰী ( ঘটনদি ) প্রস্তত করিলে, ক্ষিতি, জল ও ৰাজ একত্র হইল, তাহাতে অঙ্কুর জম্মিল, তাহা হইতে শাখাপল্লবাদি উৎপন্ন হুইল, বলিলে,—বৃক্ষ জন্সিয়াছে। কিছু দিন পরে সে সকলে যে সকল অবঙ্গবৰিশিষ্ট হইল,আখৰ। সে সকল অবয়ৰেগ্ন সংযোগ বিধৰন্ত হইল, বলিলে কি না,—গৃহভগ্ন হইब्राप्छ्, यवः झुण, बब्रिब शिब्राष्श् । डादिब्रा cश्ष, किक्रम पल्लेमाग्न উপর তোমর ভগ্ন, ধ্বংস ও মন্ত্রণ শব্দ কুরিয়ছি। বলতে কি,অবয়বের পৈৰিস্ফূৰিকার অথবা সংযােগ এই অন্ততমের উপরেই মরণাদি পঞ্জের ব্যবহার হইঞ্চ থাকে। पनि फाश्ोई श्य, उ८य ऊंस मिर्बौब श्रृंगार्थ श्हेप्ड फेंश्लेब्र। ०णऔय "भा:धं जामब्रन क्रब्र ॥ कांइ श्ध्ण भूषिद्रङ *ांब्री दाऐएक cय, बौषरु गनाएर्षब्र बन्न५ कि ? छद्म, बझ१. श्रान्न किङ्करें जप्र, चवश्वप्पन्न भशूर्फ गtrबांश्रङक छद्म ७ष९ जांशब्र किञानपटाद कञ१ । ‘वृङ्काग्नङाखदिइडि:' कब्र१ ७ जाऊखिरू विभत्र+ मचfम कभ । cष कांब्रषकूझे बौदएक ८फ़्शनिअरब्र ভাৰৰ খিয়াছিল, সেই কারণকূট ৰ ৰোগনিশেষ विनः श्रेरण थझाडविशह१ वा भशक्विनः अधिक भञ१ रब। : बब* श्रेष्ण cनशकिंच चछ अकब्र विकाब के»fश्च रद्र । चड७ष अरबक्नकटभत्र श्रदर्सनष्क्नब नाथ चथ थ*किशन बिनष्क्ञ नात्र बब्रवी, अश्ञछ कारवाहाश्र्षक हेरछ खणण. নিম্নোক্তক্ষণ নির্দেশ ক্ষরিয়াছেন, : "", “অপুৰ্ব্বদেহেজিয়াদিলংঘাত্তৱিশোষণ যযোগশ্চ ধিয়োগশ্চ" ऐशंप्७ अक्षाब्रन कम्न मारेरद्ध भएङ्ग cर, झम्न’ जाँचब्रथ wé झब्र, मिग्नबच्चय बच्चन्न मrह१ मिब्रवग्नरुपब अबब्रब मांझे,

  • इछब्रt१ लब्र१७ झाहे । श्रांच्चा निब्रवग्नद ?, cनजङ जांच्चाब्र भद्र१ नाहे ? मिडाख रच७ निजक्छद देत्रिजत्रप्भबs

幫鳳嘯 महे । : जांग्र ब्रदङ्ग मां, ऐछिब्र बाग्न मl, aहे निकॉख यक् िनका श्ब्र, छांइ हेदएन फाबूक भब्रिब्रांcझ, अनंमि यज्ञिय, श्रांधि बद्रिणांभ, ७इँक्र' मा बलिइ! 6भइ झझिंप्ष्ठ,cुइ मब्रिध्व,७हेङ्ग’ ब्रह्मांडे ७ S BBDS DDS DD DDD DB BBB BBB BS BSS BBBBB काव्रण कि ? कांग्र१,-८जारक ७३ इछमान नश्कइङब्र अर्थी९ cनश्, हेकिब्र, @ां५, बन uहे नकरगन्न नबिणमं डांरदब्र दिनांभ लक्रा रुग्निब्रांहे भग्नण भक-७थरब्रांर्ण कब्रिग्न थांहक । किरू প্রাণসংযোগের ধ্বংসই উক্ত শব্যের প্রধার লক্ষ্য । প্রাণबjांशांश्न भिवृक्ष मा श्झेरल अकृ७णिग्न जषक निबूख हब्र ना । ‘औबन’ ‘अङ्ग१ ७ई श्रृंकव८ब्रध्न थाँठय अर्थ अरुवष५ कब्रिटण७ কথিত অর্থ প্রতীত হয়। জীব ধাতু হইতে জীবন ও স্ব ধাতু श्रेड भङ्गणं । और शाकूा चं च++शङ्गि१ ७ श्रु शंकूनि च । প্রাণপরিত্যাগ , সুতরাং বুঝা যাইতেছে যে, প্রাণ, স্বভক্ষণ BBBBBBBBBBBBDD BBBS BBBDD DDDD DDD अव९ ठाश्र्रश्न दिएक्रम श्हेप्यरे बग्न५। फ्राप्छहे पनिएङ श्रेष्व, अग्नह१ च्यांच्चाईब्र दिनां* श्ब्र नl, cनरश्ब्र गश्ठि छहां★ विरुध्झन - हत्व भाज। अश्रष्ड७ सूकन भच्च श्रु मा, नूरुम भन्त्रीज छ९णब्र दद झछ। चमि भन्त्रिणबन। अबूक बझिश ७ गकण ऋक्षद्र फर्ष से°छद्रिक । याकांब ऋषमण थाकाण्ड्हे cमशक्रिणश्थाठ অহংপ্রত্যয়গম্য ছয় এবং লেই কারণে লেই সেই প্রক্ষণরের 8°फ़ाब्रिक थरब्रांत्र श्बा थींएक । किरू धीनगरहकरभङ्गपत्रश्न ৰখাৰ্থ মৱণ । - ‘. . " औद थचक्कन कब्रिङ्गः मधलीयकींद्र रूपहर्षी ; जागङ SDBBSBBB BBB DD BBDS DDDDD S BB गकण्णद गरझाब रजनशैट्ज भद्र भद छनगिस रहेबारद ।