পাতা:বিশ্বকোষ চতুর্দশ খণ্ড.djvu/২১৮

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মরুভূমি कांब्र:१ ७रे गभूकांब फू-षदjइ जांभद्रक्é कोणकरब ७क एहेधा बालूकायद हमशैब cभखकcन गर्दीबर्गिल न हऐश्व ? खेलिषिर्ड दाजूकोभूर्वcस्थरे बझाङ्गघि भारत्र अछिश्डि। श्रृंविधौन्न थध्बकं इत्ण३ दिल्लीर्ष भक्रङ्कथि झुंडे श्ब्र। ७झसूक्ष क्मिाण कानूकोणब राज cत्रविष्मरे गाथाब्रथछः आभङ्ग बत्न BBDB BDDD BBBDS DDDS DDD BBBDSDBD DD चब्रि, शक् ि५३ प्रशंनeणि बांनूकाबङ्ग बक्रकृमि न इश्छ* श्वेक्{ब्र। শতক্ষেত্রে পূর্ণ হইত, তাহ হইলে জগৰাণীর মপ্লেক্ষ উপকার DDDD DDB BBBS DD BZH BBD BBBBB , केक्ट्स कहेबांद्र भूर्क कांनाप्नब्र विालणा कब्र केल्लिङ cद, wरे बिनाण जछाथ चमभन देशद्र बfशिछ* बt ।। 4गहे मणणबन्न जसर्व-निब्रखी बिश्वनिष्ठां व्र हेध्झांशैौ८न खाहs *क्रिकणिङ दरेष्ङाइ * खिवि औष्टबन्न प्रमयबावन्न चल विकूश् ऋब्रन ना । ह्यू बिचकरे ब्रभाच्च माध हक्केटच्हइ ? ५ध्ये <रङ्ग श्रृंक्षिौद्र क्लेशृब्लिष्टtण खिछ किङ्ग मुबछड़ तििछिइ फबदहाँ श्रीब्र-१ यग्निब्र श्रृंहक । इ-अरु झार्य चक्धन्न, श्षा संइ ध्द "अक्रङ्कबि” c.ॐ नमछ अक्षांडरग्रज्ञ मrषr *रूै, अर्थ१ फू-ङ्करप्रभई ¥हेकर* थक्कृभिाङथर्वमनिड की कदरण cवन कश्नौथरबढ़ त्रिद्रभ चर्श्व चरित्र वाहेक, छाहे पक्षच्य ऋडिटेबल्लिाहकत्र अछ त्रिषबाइ श्रहरन थचिषणिक रहेबब्लक । अंक ब बड़ेय्ग क*नहे cबरे कशक्लि छू५७ श्रेप्ङ संछझमण, क्षत्रिलौब्र ऋत्रिfनद हद्देइङ कडिड अई है - , नष्क्रब्र दक्षी ब्रांद्र, वक्रकूक्रि. चालूकक्वनि श्रृंपैंषित्रण केचथ श्रेज कनफ्नौङ्ग हरेक ऋफ । देहाङ्ग कोद१ कि ? छविक्ट्रक क्रिकि९ व्हगक्रीन रूहिक cर रेक्ञनिक निकांख् फेगऔऊ द७ब्रt णिग्रांरह, जांशदे बिरह नभिसंकॉरब iशख হইল। প্রোফেসর টিগুলি গাছেৰ এমাৰ ক্ষঙ্গিাছেন যে, DBBB BBBDBBD DDD DD BBDDD BBB S ইহ সপ্রমাণ করিতে গ্লিয়া তিনি দেখাইয়াছেন যে, কাঠের रङश्रृङ्गकेशप्तश्वखि ०३ क्र्छि बर्मेनिइ ऊंङ श्वक्लि ने• ७िऔँ । SZDDB Bgg DBB BBBB BBBBB BBBBB लिङक३ठूल चकि कांद्रङ चtररङनांजtङ फेकी श्यक cए** यांग्र कक चलिचल्ल ऋषैक्ऋिभद्ध वैश्वङ्ङ1ॐन हरेरक चjक्रख कब्रिह्ण , शैक्रा १ीन अं★♚ रहेएक थांएक ? किय६.कांतूछामह८करल रर्षीक्रिकृ**डिङ बद्देख चलि. कैङ्गहे भक्रीब्र फ्रें★♚ इ३झ केt* . द्रक ऋर्षःस्थछ, कज्ञ श्रङि, कछकोण, भग्नप्ले कैडर महेष्ठ લાક્ષરઃ 愛 - - 砷 कथि छ,भच्छत्र वफिनश्ररश्वरद ।। * गझड वाङ्ककला 穹 [ ২১৮ ] - šeg अक्लकूमि किङिचैश्च ऋक् । *५ण श्iश्न cबंशं निक्स्ळ ॰ब्रहश्वंब कांडि क्षक श्ष्म बक्सिनिड रब्र। ऐश्इ श्रएर, मघ्था २.४ो भाइफू cपथा यांङ्ग ! ७द्धडिग्न ८कोन ¢कॉम एांप्न खलदिभिले गर्छ वा जणांनद्र आग्इt झरे नक्ण जगाइबिरज क्रूज ऋज माझ्झंझक्नुई७ छश्रिम्न किब्लक ! - eणाश्कि वर्च दीप्यत्व छांइ झुठे श्ड ॥ ऐशञ्च णांण चांडा शि*णrग्र अस्थिञ्च ह४ब्रांछ cवt६ छ्छ, cवन्र चल९क्षक wमईट्टभग्न थपर्दछ एड्रेरङ अथितििथ ििवश्व इ३८७६छ । जहाँङ्गो बग्नভূমিত্তে ২১ম খর্খর ও জঙ্কাক বৃক্ষ দেখিতে পশ্বিন্ধ दtब्र । बांनङ्ग 8 मृभंशंग gहे नकल झण आहे¥ ब८क्ष मtथा क्विांदन eaठूख करेञ्चt शं८क } ४धीयत्र श्रमश्धीक छेडे"चौ (Ostrich) बिक्रब्र१ कब्रिएफ cमथ वांछ । हेहीब्र कृिछेिकि ७ *चूकॉनि दांडेब्रां ॐां★ कां★न कटङ्ग । श्वदे यकृत्हरुल ८कांन बि#िडे ग* नोहे । हे सिक्ख भषिकमिगरक अवफब्रि बभश कब्रिद्वादे शखर ऋाष्ट्ञ वाहेरफ झग्र । ७षीनकांब्र *बांबून" नांगक भग्निद९ छेखर कांडू अझ* लझकब्र ८ष, फेड़ेপৃষ্ঠস্থিত পানীয় জলসমূহ ক্ষণকাল মধ্যেই গুৰু ৰুক্ৰিয় ফেলে। कविज्र अक्ष एक,४क•६ श्रृंः चरक्ष अिकरुण पोष्टीबद्मा झुद्दे गएथ्व BBB C A S DD DDSBBBB BDDDD BBBD S uहे श्रृंदर्भृङ्गाह व्छछूबिस्छ *र्षिक ११ कईौक्लिकtब्र कूरुहंक *फूिद्रा अध** कांग्रtझेडः क्ष८क । आञ्जिकत्र छेख्द्रभूर्ति प्रवः शूर्कक्ट्रिकब्र मक्कदिखांठश्रब्र शूर्क ७ बचिकांभल च्कि मानक बर्कब चाङिद्र बांग चtrझ् । উত্তর-পূর্ব “ৰাণ” মঙ্ক ভাগ (প্রাচীন “সিরেনাইকা” ) ভূमक्षशां★छ ***ख किैौ{। ५३ फेखcइङ्ग गश्ख्हेिं 'बिबिछां' अमुंबक झकडाश्र नम्बूङ । निविद्म-दछ बिगड़ ब्रांप्बाब्र भक्रिरम অবস্থিঙ্ক । ইহা দক্ষিপে নিউবিদ্ধ ও আবিধিনিয়ায় স্বস্থরGकब *र्थञ्च हिङ्कच । ऋक६णद्र देशं मैगबह vijब्र. कृहेब्रा BBD BBBT BBBB BBD DDDSBDD পর্মস্থ চলিৰ গিয়ছে। পরে স্বয়েজ (এক্ষণে কাট খাল ) মোক অভিজ্ঞ করি আৱৰদেশে পালেভিন পুর্ঘ্যৰ জারবদেশের স্বরূৰিজঙ্গেয় মঞ্চৰত্নী স্থলে এসিদ্ধীনাই चtछक, cयहांब्रः * श्रबांक खेथछत्रद्र कच अचिनttप्रक३: , ६लएाश्वश्रज पर शैलीत ५ शश्कल बीब श्रातरौ शंक५थते.विकिरें★क.कल १eत्राकडूनङ्गनि