পাতা:বিশ্বকোষ চতুর্দশ খণ্ড.djvu/২৭

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अध्यन [ २¢ J .۷ پ.م यषब निtर्कन कबिशा बिन । अचा डचमै चनकाण क्लिड कब्रिद्रा उँiशtरू कश्णिन, डूबि cठावाब थई बध्नारबाइन-बूखि उ “ भून्नबद्र नकभरग्र शैौनूझवश्चिटक cमाश्ठि कब्रिजी छिद्रशाबिनौ 'रुद्र यबर्द्धक श् छ । cदर, नक्कै, किव्रङ्ग, गर्छा, बछ्या, आछ, भकी, कौधे, नङध अङ्गडि नकथयाभिवाजई cङायांद्र भबना श्रेरक् । अछ स्थामैद्र कथा दूरब थाङ्कक, चाबि, बिपू. ७ बाश्वत्व जाबबा5'cडाबाब बनवडौं ररेव । इवि चs* यकबद्धप्न ७थाविनtनञ्च खबाइ <यंtदनं कहिब्र नछछ त्रुषजनक इहेद्या जनाछम शृहड ब्र थयर्डक ख ७ । अकल «वfबैङ्ग ममऎ gडांभाङ्ग *नवाप्नब णका श्रेrष। पूबि केशक्ष्णिब्र नउड बडडा ७ जानच नव्णीषन कहिrष । चांबि cठांबाब्र ५हे वृद्धि मि*** कहिलांब ! cर भूक्षप्थ ! डूनि चाबक्tिभद्र ५षः विषाठाद्ध छिड यषिड कबिदा डे९नम्न श्रेबांह, ७ईबछ cणारक फूर्षि बचषनाएव चडिश्डि रहएर । जनप्ड डूबिचनावाद१ कांबझगैो, kडामrद्र नवृत cकश् नाश्, ७३बछ cठाबाद्र माब काय, cणारूनन्श्रक बख कच्चिरब ७ई अङ बनन, बशरषप्रव्र ब*fबाcच गमषं ७३ छड़ ब*ाँक 8 कम* नीरब षोड हद्दे८द १ cठांबांब्र **नरब्रव्र cरबन "ब्राजब, रेवकदाज्ञ ७ cशौजाज यङ्कडिब्र७ তাণ ৰিকম নছে । স্বর্ণ, ধৰ্ব, পাতাল ৰ সনাক্তন ব্ৰহ্মcणाक गकण शरनई छूमि पाकिtब। cर cरडू छूमि नर्कशानै, अर्षिक थांब कि दणिव, cडांबांबू नयाँन ८कश्हें माहे । (aहे <aखां*ाडि भक cछाबांच्च मछिलविड श्रृंख्नेौ «थषांन कब्रिएबम । जमडब्र भवन ब्रबकै-ऊ-जश्न कूशबमि{िड नब्रानन यद१ হর্ষণ, রোচন, মোহল, শোষণ ও মায়ণ নামে প্রসিদ্ধ মুনিविtभद्र ३ खांमनाथक भून्नबइ *कनब्र &इ१ कब्रिइ cगहे DDD BBB DDDBB DDD DBB BBBS BBB णाभिtनन पश्य१ ठांविtणन, अक्र! cर जामाब्र वृद्धि निर** रूब्रिह क्tिनन, फाश भरे बूनिभए*ब नबtभ उचाब्र ठेगब्रहे निरब्रां★ कब्रिड्रों *प्रैौभ1 कब्रिछा ८वथा पांडेक ॥ झेश छांदिङ्गा भवन गकTांब्र नाचकांtङ बचांद्र फेनब्बहे भब्राचकभी कब्रिएलब ।। ऐशं८ड अचाब्र बाबांबिकांब्र खेvहिङ झरेण । चमड़ब्र अका কামমোহিত হুইয়া পুনঃ পুনঃ সন্ধ্যাঙ্কে দেখিতে লাগিলেন। उषम ढंशब्र पन्त्रीब श्रत्ड ७त्काननकान९ गाकिस्त्राप्तब्र चांदि6ाद इझेण । जांब्र कांधभङ्ग-विरूो नका इहेरङ दिएक्वांकानि शक मच्ण अब झ्म्लापिडक्गा उ९णब श्रेन। - बकाइ iब्रन कीवकोर tवविद्र भशरवर डाराएक <डावीक कि कांबडार केनरिक्ष श्रेण ?' इधि रक्षनाजगपूरश्त्र XIV নিমিষ,তোমার পক্ষে এই কেতিলক নিতান্ত জৰোগ্য। লায় পুত্রবধু ও কষ্ট মাতৃভূণ্য, ইহুদিগের প্রতি কৰাসক্ত হও অতীৰ পাপের কার্ধ, ইছা ৰেৰেন্থ निरुाड । छूबि नावाड काrवद्र यडाएर उाश दिक्ख् इहरण किक्लtन ? बनछह निष्ठांमइ चकtब्रइ कथाह लकिड हझेब्रा यषप्नद्र अछि कूक ह३८णम। उथन ङिनि बरनरक बनिन्छ चाभित्णन, "डूबि चाबारक क्षब अकन गखा ब्रिाइ, उपन फूवि এই অপাৰে মহাৰেৰ বাৰ্মানলে ক্ষপ্ত হইৰে।" ব্ৰক্ষা এই অভিশাপ প্রদান করিলেন। ५३ बिषाङ१ चडिनान छबिब बक्न उकारक रूशिनन,बकम् ! जाननि ८ष बलिबाहिरनन, थायि, विकू 4द९ वरश्वब्र चाबब्रा गकरणहे cङाबाद वनवउँी. चाणि डादाब्रहें नर्ब्रीचा कब्रिदाहि याज, चाथि निद्वश्रद्वार्, अङ७र चाबाइ ७.३ चाण BBB DBBS BtEBDD DD DDS DDBB DDBBBS ৰেহ্মপে তোমার শাপ মোচন হুইৰে, ভাষার উপদেশ জিতেছি, छूबि यशरश्रवद्र नइनामरण छईौडूड श्इ नक९ ॐाशबरे जङ्घ&रख् जावांछ कईौद्र गांशे८व । बशरषद दथन दtब्र-ब्रिवह कहिरवन, डथन डिनिझे cखांबांरक श्रृंग्रेौघैौ कब्रिtरुन ! ७ड़े बनिब बषा चढश्डि श्रबन। পৰে ৰক্ষ মনের পত্নী নির্দেশ কৰি ভাষাকে কছিলেন, मषम ! ५हे जायांब cवश्वाङ कछ, ऐशद्ध नाम बख् ि। डूबि हेहांटक विदांश् कद्विश्वा शूcष काणांखि*ांड कङ्ग । भक्न देशांक विकाश् कबिब अश्ब्राप्ण भूक्ष श्रेष्णन। DDDD DDD BBBBB LSBBBBBD DDBDD DDD DD कब्रिाफ बाहेब्र भश्रबरबग्न नइनानष्ण क्लीङ्कङ श्ञ । खश्cक्षं द्मि शश्डि श्रां ऊँौद्म बेिर्tश् श्रॆण श्ररङ्ग षशन।। 3्नब्रfछ् শাপৰিমুক্ত হইয়। শরীর পরিগ্রহ করেন। কোলিকাপু• ১ ৭জ) ज्ञचंद्रैविंशं &aङ्गश् षश्च ष८७ ०९ चक्षारं बङ्गानद्म फे५°खिदिबब्लक जिथिङ चारह । बाङ्णाखरब ठाश्। निषिज्र श्रेन न । ২ ৰোগাচাৰ্য্যৰূপ শিৰেন্থ জৰজ্ঞায় বিশেষ । “যুগাৰঙেৰু সৰ্ব্বেৰু ৰোগাচাৰ্য্যছলেন ভূ। अबडाद्वा१ि नर्संश विद्याश्क डभवन् दव ॥* 母尘 खेनकष्ट्राइवांछ ।

  • cचंड: षङांरब्र मवtना शरशजः कन्न ७व क।”

(শিবপুরাণ বায়ুস- ২১•১-২ ) বখণ্ডি ভক্তানা মন ছত্তি ঘৰ-দু, মনলি খানজনকখ৮ দত তৰাং । ও মহাৰে। (ভারত ১৭১৭শ • স্বভক্ত, ৰামোৰ কামিনীদিগের ভাববিশেষ। "