পাতা:বিশ্বকোষ চতুর্দশ খণ্ড.djvu/২৯৫

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भश्च चांनौ चांइ अचडिज ‘शक्बि६ ऐणन् हेनरी मांप्य छैiशङ्गः शक्लिख žu अनंब्र अकwधांनि दर्दछखविक्छक अंह wiझर्क दांश्च । बश्नप्रन जाभैौन् प1, थरेमच् ध्वाचन <गमानङि । बश्चत्र *णदष वैौब्र क्त्रणांच्च श्रज । हेनि नबाहे नार बशन् ७ चांगम्*८ब्बङ्ग जौब अँiछ हीबांग्रैौ cनमांबांब्रक हिष्णन । सजबांडপ্রদেশের জাহ্মাৰাৰ লগরে ১৬৮২ খৃষ্টাৰে তাছার স্বত্যু হয়। जश्धन चाबैौन्.प1, बऐनक ध्वांभण-गन्निव। बिबाव फेन् बूनक चांगक-बाब बांड बौब दशकेकौरमब्र गूज । नबाहे জালমৃগীরের স্বাক্ষ্যকালে ইঙ্গি জন্মভূমি পরিত্যাগপূর্বক छाब्रएङ चाश्रमन क८ब्रन ७ष९ छेख गद्धांtछेब्र बशैौटन कईछांब्रिপদে নিযুক্ত হন। ৰিচক্ষণ ও কূটবুদ্ধি দেখিয়া সম্রাই মহম্মদ শাহ ●ाशtक चैौइ ●यषांन नब्रामलनाछ कब्रिव्रांख्णिन । जब८भ८ष ४नइष cशएनन् चानौ पात्र वृङ्क ७षर बाङ। ४गब्रन चाचइब्रा थाब्र काब्राप्द्राध्पन्न भद्र डिनि गजादांइ चइअप्श् 'हेडिभन् उप्कोना'डगाव्रि गरिउ उबिोनन गाउ क्रब्रन (०१९०१ चः ) । किरू *iब्र ष९ण८ब्रहे cब्रांधeयंख एश्ब्रीं छिनि चकांटण স্বাঙ্গগ্রাসে পতিত হন । जश्प्रन यात्रैौम् ब्रडौ, इकड जाणिन् नांवक औषनैौरकाशछकद्विष्ठा । थांबैौन् जांक्रन जारब cयनिरु । गबाहे थकदब्र भारश्द्र ब्राबरुकोरण seas थुहेाप्च डिनि फेड aाइ गयास “ कcबन। थरे अtइ डिनि नाडि१rडांक ब७णर नख कडूब ' ङ्4मi, et५tत्र अवक्षांश्म बंदिवङ्ग बिंबझ१ ५:ब१ ड९ृह्णींशैौन अखिलावान् कखि ७ कविशcतद्र औबर्नी निनिदरु कब्रिब्रा निद्रांश्झब ? - মহম্মদ আমীর খাঁ, বেগুন লাগিৰি কাৰক উৰ্ধগ্রন্থ-अदनख1। श्रां★यांनण८ब्र छैाशत्र अश्र शत्र ! चांद झण कारमब्र नेणार्नी मांघक बूनणयाम गांधूब औदनैौ श्रवणबtन »vs१ ९.४ाग्र खिनि छड् अंश् गमांश्चन कानि । মহম্মদ আলাউদ্দীমূধিনু শেখ আলি জল হিস্কাফি, कडाव झन् चन् भूषछाब्र नाबक चांहेन्āइब्रछब्रिङ । देश फन्दौद्र-फेन् अवगात्र माभरू अरइब टीका। अङडिब्र ऐश८ठ कुक्लक खणि cमोकक्रमाद्र क्लिब्रिनि-स्थछि णिविज्र हरेङ्गाएइ । अश्याम जालौ थ1 (चान्गब्रि), उiबिष-३-बूबा:कन्नैौ ७ दश्क्रण बक्साब नामक ऐडिशन-यtनछ । हेनि शबिशूद्र ও জিছভের ফৌজদারী আদালন্ডের দায়োগ ছিলেস"। মহম্মদ আলী খাঁ, জনৈক ৰোহিলাসদ্বার। রামপুরের ८ब्राहिण-नर्वाब क्बफेन्न चैत्र cबाड़े 'शूब ॥ ऐनि ४१०s ९: * थरच निश्नन्नख्धि छडब्रक्किाईी एन । किरू जनखिकाण [ ఇxt } कश अरात्र बाका cमाणाधभरक्त आररक काबाक्क कब्रिट्न। बश्ञ्चन कठ्ठि डखच्प्य क्रिछ कछन। रेशबाब अवार्षके हक अवाच -बांबांजक नूब चांगद थांब *ीचांक्लचम कक्रिब cभोमांच वरुचराक विशेबाड*नी कब्रिडा कनिकाच्च चानक्न ऋजब ।। किरु ििन क्काकाजा कवित्र छाए१ पाक्षिाएका छेन्द्र क्लनलग्नङ्ग गशिखं बिचिख.ड्य द् िउध। एऎश्च *१•१ ६: ष: कांबूरण *नांदेश दांब ।। ५षांम कहेरङ डिनि बयाम धरश्ब्र गश्रषांtत्र खांब्रङ-चांजयप्नइ cकडे गाहेबांशिणन । चचन चानी पीब वृङ्गाब ;ाब बदका ध्यदब, ५ »०• ९* श्रः ५षर वरवर पूबक चांर्थी थl swee .९डेizच बांद्रशृहমসনদে জারোহণ করেন। * - r * *:. मश्नान थांनी थ1, कशीव्ररूड बटेनक, मदद । अनूठब फेर्षौन्थीब्र श्रृंब। फिाब्र बुङ्कान्न श्रृंइ, देमि अवाक खालिङ्ग बप्नब ७ ३tबाम्बञ्च गदप्रानिअइ ४१०० ९ जः शिङ्कविाहनप्न चषि*िङ इन, ०१०* ** श्रः छाशज्ञ कुंझ वtः । .. बश्ञ्चन चानि-बिन् शंभिन्न, “छाषि-३श्षि-द-बिक, दा छाछ मांव मामक देखिदान अर*खt ॥ . . . . . . . . थइन्प्रन चांनी थ1, cडांप्कइ चtनक मदन ॥ cबालािं BBD DDD DB BBBS BBDD DTS BB BAtt जप्च निरदांगप्न खे°विडे झ्छ । लाखांङ्ग इकwांकां८७ -मिकs षाकाश डाराश्च भ४४१९ चः रेवाब थवम्बके बायकाच् क८ब्रन । भv१० ९* चः दे९ब्राथब्राप्जब्र ब्राबटेनडिक.ब्रिछान श्रङ ॐाशब गूब हेबांरिव चानौ पॅiएक बवावन्रब थञ्चिदिछ कुl इच्न ! . श्रश्न्द्मन चालो बौब्र, बिच्चाहे उन्मको बाक्क अश्आरक्छ। दूरीन्प्छ इंशत्र वान हिण । मश्न्धन च्यालौ भैौण्ञा, चाबाषानैो जtनक बूगणनाब-कवि, छिनि कांदाम्रछनांच्च जड़ *ञांहिब्र' · छेwiचेि जाछ कदृङ्घञ ॥ ॐीशङ्ग निका श्चूि हिटणम ॥ और्थ बाकब्र डूणाचाहे नाथरू अटेमक छाटङ्गग्न मिकछे उँइक्र - नििच्। कन्ट्स कब्रिएकम । डेङ बैौर्थ बांक्रब्रइ cकtन दूब गडांनीनि अl. काकांब छिबि ७इ श्चूि छ्रजाब्र वांणकनूबरक ऐनकोवक्रत्वं बौचिङ कब्रिब्र जांगनांइ णन्नखिइ छेखङ्गविकनंझै कtश्चम ॥ जtकरब्रज्ञ अवैौtन चांकिब्रn कईजrाणै कणिक ऋचत्र जॉर्जी, डेक्वचि ertछ.दकy बैोॐ जांक्टहज वृङ्कछ नञ्च हेनि बtrबनबन्च वैiब ऋ*अरब चानिह पान क८ब्रन ? दांप्ननवरचब्र वृङ्काश *** डिणि कईबीवन ए३८छ चक्नग्न अद१ कब्रिहः निर्थप्नश्रे : *कांणालिकाछ कन्छत्र, थरे अनrm aभ*** ऋच ॐीदtब्र वृङ्का कd>॥ B. ‘. 橡,