পাতা:বিশ্বকোষ দশম খণ্ড.djvu/৫৪১

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ásammmmmm ব্যায় (লৌকিক) अञ्चनझांकी कूछबtaणि ७ tशेकविकरञ ५३ मांरब्रध्न ठेषांश्इन क्ब्रिाप्य ॥ ae । একবাক্যতাপরানাংসঞ্ছয়ৈকাখপ্রতিপাদকদ্বমিতিষ্ঠায়ঃ। tDDDBHHB BB BBD DDD DDD DDBB BD DDDD DDS *ांगक श्ब्र, उझ* cष हtन भिलिङझcर्भ ४१कtी कां*ी हड्रेच्च थांटक, cनश् इtज *३ मjाङ्ग इहैब्र षांtक । s৬ । একসম্বদ্ধিজ্ঞানমপন্থসম্বন্ধিম্মারকমিতি স্বায়ঃ। cषक" श्रौनर्णम इश्रण जनब्र गचचौ शशिभक ( थाहठ) ठांशाझ श्रंइ१ इङ्ग, Cगरेछन् cष भएन ७क्जचकिल्लाएन वोन्न नचर्चौड़ ब्रा५ श्ब्ल, cग३ इएल ७हे अjीब्र झझेब्र! षांएक । ৪৭। একাকিনীপ্রতিজ্ঞাহি প্রতিজ্ঞাতং ন সাধয়েদিতি কায়ঃ । cकषण यद्धिसा अङिझोठ बखमाक्षम कब्रिtष्ठ *ोtग्र म), अंडिलांक्-ि भकक३ अठिछ, cश्छू. छपाश्ब्र१. निश्रमम ० उगमत्र अरे #tळभै३ कार्की जोषम कड्रिघ्न थॉ८क । यउिखांभांप्रब जर्षनिकि चबगडष, sई छछ (एजॉब्रि अर्थमिझिङ्ग बअ; अवछक, अरेङ्गो cष इष्ण इत्र, ठथोब्र ७ऐ मोग्न हहैब्री शीtक । • a৮। একামসিদ্ধিং পরিহরতে দ্বিতীয় আপদ্যতে ইতি স্থায়ঃ। ७कम्रै क्°िन् इश्रङ प्लेक्काम्न श।छ कब्रिाऊ इङ्ग्रेष्ञ्ज माग्न ७कप्ने विन्न জাসিয়া উপস্থিত হয়, যে স্থলে এক দুঃখ হইতে উদ্ধায় হইতে গেলে আয় একটা দুঃখ উপস্থিত হয়, সেইস্থলে এই ন্যায় হইয় থাকে। - "५कछ इ:५छ न शायदछt डावश्ठिौब्रः नमूनश्टिt cश ।” ३श३ sषांशद्र१ ।। ঔপধিকাকাশভেদগুtয়ঃ । উপাধিৰ আকাশতো, তুল্য ন্যায়। বেঙ্কপ এক আকাশ উপাধি tडप्प्र मांम, यथ-शप्रैोकान, शtाकां* श्छrानि । किरू ७*ाषि ठिtब्रश्छि श्रण बांकां★ ७क, 4श्ब्र* cष इtग sक दल भाषाइरखप्न षह शब्ल, cनरेइएल ७३ नrांग्न इग्न । “খটসংবৃত্ত জাকাশে নীয়মানে ৰথ পুনঃ । थtफे बौtब्रड बांकणि९ छदश्छौtव मरखjन्म: ॥” (थउि } ७क३ ६छठन, मकज औरव विब्राबमांम। cत्रहे ७क अ५७ &5ठमाएँ डच् ।। ॐ बमध्यां द्वक्षरैङिa; Gश्रiशिष्खण् चft९ एश्चािङ्गि crश्tहि ८ठि विलिइ हरेब्र! मृह् श्रेa1षांtक । बड़ठ: फtश जडिञ्च ध्व बिछिद्र नरश् । **ाथि अखहिंठ इहेtबहें ७क मtछ९ दह ॥ cवधांछप*cन aश् नाicग्नब्र aङ्गेझ°ा छेनाइड्रन cछeब्र! इहेब्रttइ ॥ မိဳ႕ႏိုင္ပါ” 83 क%5ांशैकङ्गछांइt ॥ कkइिड प्रव4 ठूषण, उड़शा नात्र । प्रव4शत्र अजान्न ब्रश्ब्रिांइ थथs DDDDDS DDDD DD DSDDDD DDDS DDDDD DDDDS DDS क्लभ cर इtण क्च् चांtइ. चषक जबननड: कई हदेब्रारr डाविद्रा इ:थांक्रूखर श, णtइ अब बाबिष्ठ गाब्रिtज ऋष इश्च चाररू, cनश्इरण *३ भाइ दहेत्र थप्रक ! श्हात्र डबाबब्र° Kक्राप्स अिश्कन्। ब्रिविज्र चाङ : च७:निक ●क्राकक औव cप चक्रोनकलछ: किtछ,ऋथ छःथ भूछ अनिग्रा अछानबन्डः कृःष cञ्चात्र करङ्ग,"रब क्यब छकव्वनि अङ्कड़ि काकुल जाञ्चनाकारका रुद्र, **य अमत्रलङ६kष झः" छिन, फॉर खिद्रांश्ठि ऋग्न ॥ ge 1 X set or . ಈ (#) e४ । कन्नघट*iांणकमझांद्रः । ०कलशे चक्षशृण डशश क्वभ ककछ अकरा वक्रकनीक चूरघ्नाक्नब हव, नश्छन cष इष्ण नकक अरक्ह तीककत्रौन कjर्वअङ्कुखि श्ब्ल, उषाद्र अरे मप्रइ श्रेछ। थोरक । कश्चrभालुक भ्रूण जुन BDDD DDD DDDS DDBB DDHHD DDHC gD DDDDDD DH BBHHBB DDD DD DS DDHSYD L D DD DDDD DDD श्रेष्ण क१फाषाछि अलिदास शून्९ श्रेढ भष उक्काकि इन्न, थरे अन, sं श्ड़्ंण बङ्गश्षंशंiजश्छी श्ा । “कपरtगणक बाब्राहू५-सिः कछछिकtङ " (लोकां★भि ४९e ) पंद्रहेtद्र सफ़ म) षाकिरणs ७क चाप्इ छविग्ना cनदन कह, फ*णी छाङ्ग । cष इरण कछ बारे थभक cगदे बखन अङyाणtद्र क्रां*ा अधूलेफ क्लश्च, cनई इtन ** छोच्च इ३ब्री थांएक । ९e । कङ्गकछोप्लग्नु ! कड१ अश् नश वजिष्णरे कब्रडूब* श्श cतोष शश्श्री भएक, कब्र ५३ *का निधtब्रांबन, किड़ कब्रकक१५३ नल बजिtण कइन(जग्न कक५ बूडश्त्र उर्जा छाइ। अरेब्रण (क् श्रण वण श्रेत्र, गरे श्ण ७३ छात्र हरॅक् । as । কাকতালীয়ভায়ঃ । काकभबनकाष्ण फानगणन उद्घृणा छ । गाकासागा छन्द्र श्श्रङ कांक लेढ़िब्र दादेवांबाण शनि उोज *क्लिब्र-दांश, फांश इश्नं कारक छIण BBBBDB BHHD DD DSH DDD DDS DDD D LSDD DDDS DDS BBB BDD DDD DDDD DD BBL DDSDDS BB BB BDD क्रूषां★ कांठद्र श्रेंद्र छांन इकठप्श ७गरषशन कब्रिव्र छाविtफ लांणि, ५३ नमब्र पनि अकüी फाण भएफ़, छांश श्ण आभि ये छान छक्र१ कब्रिग्न। क्रूब्रिश्खि क।ि गै शुष्क कडाप्शन्न ७°ग्न भूक्षी ७को कोक बभिग्ना श्हिा, में काक छ९कलां९ ७क्लिग्न cणञ, cनई नभग्रहे ७कर्छी पठां* •ष्ट्रिज । ऐश्tस गषिर्कङ्ग अर्खौडे जिक श्रेण, अषिक काक ७ फाएणव' बााभाग्न cगषिब्र! थप्न छIविण, कोक क्षछिब्र। शाश्वब्राप्७३ फाल झिक्राप्छ, DDD DDDDD DD DD DDD DDDDDDS mmSmmS DDLD SDD BBB BBDBB BBDD DCCC DDH BttDS DDBBDD TBL क्रांकजमन काव्रण म) इ३८ल७ यां°ीकृफ़६ कtब्र१ कञिइl cवtष एऍण । ईश्it कहे कांकडlऔौग्न छोम्न कtए । G DDC gDtBt tttS DD DD DD D DHH DD DDS DSDS छtुरु हेल्ले क्। अनिक्कै हहेtञई aरै छोड्न इच्न । “ुन्न। {अक्रम१ क्य स्रो५ छ। cब श्रृ•g ध्रुझय: ! ठप्प्रल९ कtकङtजौद्रमविफकिठनशवम् ॥” ( छछftणfक } as । কাকদধুপৰীতৰস্কায় । कोच श्रेष्ठ ऋषि व्रक कङ्ग, ७कप्ने tजाकांक १ऐब्रन प्लेगtक्ल (न७% शरैश, 'कtwकn नदि ब्रचाळt५' रेश ब्राब्री ५३ब्रन बूकrरेण cष, कांक ब३८ठ cषु कशि ब्रच] कब्रिtफ इईtव, tक दल छाश नtश्, cव (काम बद्ध प्र*ि म8 कब्रिrय, छांदोरक३ मियाब्र१ कब्रिरफ श३८१ । काकणन जत्रनाभt** {ष इtण 4ऐछन श्रेtर, cनश्वरण ७१ छाग्रे बश्ब्र शांtक।