পাতা:বিশ্বকোষ দশম খণ্ড.djvu/৫৪৩

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भग्नि (cनौकिक) [ tea 1 भाॉब्र (cलौकिक } चदच हरेश्र, बरकर्न देवकप विकूद्र बकि छछिनब्रांद्र १ रश्॥ भडि विच भकब्रिण अपरै निगांधारण किकि९ ह४७ हरेण, गरइ वक्ष्य निनांबम, श्रानtखांभकारण कूठीभाकानि tषांब नद्रक श्रrष, छषय णछिनद्र इष अहश्क् । अश्झनं हरन &हे भfांग्न इक्वेब्र थांहक । १० । किद्रां श् िबिकब्राह्ऊ न वड, ऐठि माांग्रः । बिशाह रिकब्र श्रेश षाहरू, वजब विकब्र शश् न, उरुणा नाः। tजांकनकज श्धह कब्रिएल कोई कहिcड श्रृंttब्र, भां७ कब्रिप्स लाइ, अषदो अनाथां७ कब्रिप्स भां८ब्र, कब्र दां मां कब्र &द९ जबीथी कब्र रेशष्ठ नकाच tश्शू जिब्रोग्ररे षिकछ रा, क्छद्र क्किन्न शश भी ! cवशाउशनीमब्र नींद्रौद्रिकछftषा देहांइ डझाइब्र१ ४ ईक्लन् &धनख इरेब्रांtङ्ग “कर्ड९ जकड़ थनाषा वा कई १ नकार नोकिक ६षश्किक कई, षष-बडिब्राप्ज cराफ़निनः श्रुइज़ि नॉलिब्रांप्ज cषांफ़निनः शृङ्गलि, छरिएड यूशfs अप्रश्रिङ खूप्शङि, ब्रtवन गडा: जनाषा वा श्रव्हडि म श्रीहडि cबडि । मछू बप्पदः नववषि नाडीडि वा विकब्राण्ड विकग्गन। हि ५क्रश्नूकाप्नकब्रिडा"ि (नाशैौइकडाषा)। जोकिक अषष tशशिक कई कब्रिtङ, मी कब्रिष्ठ अषय। अनाश कब्रिtफ शाद्वा वांछ, किड देखब्र क्किन्न व जबाषा कब्र यांग्न मl, cषङ्ग* चठिब्रांtज cषाएँ* अश्न कग्निप्र, अथया नाछिब्रांtज़ cबाक्लकै अंश्ण कब्रिटन, भरे इरल ¢षांप्लले अश्१ कब्रिह्छ इहएव, ठाशग्न विकब्र इई८ष मा, किख अंलिब्राप्ज व वांछिब्रांtद्ध *रे ङ्गिब्रांबई रिकब्र श्रेष्ठा थाएक । गनचांग्र ब्रषदांब्रा सं! अनी c१ ८कांन &धकांtब्र गभन कब्रिtङ *ां★, 4हैइtजस १लग्न विकझ हहैtङtई मा ब्रिांबई बिकब्र रहेtठtझ्, cर इtणे अरेझण इश्t१, cगरेइtण ७३ नात्र श्ञा ५ोष्क । ৭২ ৷ খলে কপোতগুtয়ঃ । शुरु, बूषा ७ भित् कर्णाठमकण cश्मन अरू काल थप्ण गठिउ रम्न, छझश्रृं मृकशी श्रृंप्तर्षि १ककांtण अश्वग्नयिभिडे हईtज १ई माiग्न श्ब्र । १७ । १छछूसायनिश्छाग्नः । इतौ cरबन कनिथ ( करायश ) cडांजम काम, अर्षी९ छ*शब्र भएषाब्र *ीम थाहेब्रा cकtन, जषक छेगtब्र छेगtब्र £क शाक, अश्क्रन यांशरश्ब्र डिखरबू ख्ठिरङ्ग नूना रश्रडाइ अषः वाश्रिज नकन कि जाइ, उषांश अहे नjीब्र इऍग्न थाष्ट्रक । ৭৪ । গজ্ঞলিকা প্রবাহুস্তায়ঃ । श्रृंख्छनिकांनषूप्रब म:श बनि ५की नौप्ड गठिड शश्न, गएद्र नकन छनिरें लएण भक्लिद्र शाएक, ७३क्रण बालब्र भएषा ५कखम शाश करब्र, जाङ्ग भकलहे छांशग्न छांनमन म॥ cषभिन्न ठाशग्नई जबू*ांत्र कtब्र। ५३ब्रभाइरण आहे आग्नि ह३ब्र शाक । ৭৫। গতানুগতিকস্তায় । कउकeणि डाक्र१ ठ*tशब cकांना ठdी ब्राषिद्रा नबाब्र अषणाश्म कtब्रन। प्रांन कबिब्रा यषम छ**ब्र निमिख cकाचा अंश्१ कब्रिप्णन, ভুখন ८क कारात्र प्रकाक्षा जन, डोराब नि“छद्र पाएक न!, अरूमा ७रू क्क बाभ१4श्ब्रग rकाना वश्ल झ्छ cबषिबा चौद्र (कन उगब्र ७कशनि ३? अधिद्रा घांग कब्रिtङ जाभिरशन, शैशं★ cवभप्न*ि नकरजहै ४ैरेक्रन् কোশায় ইট রাখিয়া স্নান কৱিন্তে লাগিলেন। তখন বৃদ্ধ ইহা দেখিয়া ছাপ্ত कब्रिह कश्रिणण, नकन cनांकरे भडांइनकिरू अर्ष१ि cण्थाप्शषि कई करश, रखड: षषारवाथ cकर विtवाना कt३ मी. वरि बूभिमूर्तिक कब्रिड, छांश श्रेन अकअकांश श्शि क्डि न। ५३ अकश्न आक्र नकाणरे भश्छनिकायदाश् भारी किएषः जलगब्र-नब्रा नाrा 4३ जानाबाशकून *ङ्गिब्रां पोष्क । अऐब्रभ इरलरे ४५१ माद्रि एरेब्र! चांधक•। १७ । सङ्गविश्किौछांइ: । - चाणकएक निचनtत कब्राहेरठ एरtन (षभम फांशद्र ख्रिशांद्र छड़ cजभ रिव्रा भिन्न थाeद्वारेष्ठ रा, ७३ हप्न निचएउाजम कब्राम३ थप्छाबम, भ्रछcणन धरनीलमबाँज ॥ ४१क?ी पालक 8६५ जडि विकौ दनिम्न cनयम कब्रिाङtइ मा, डाशरक वणी इश्ण भूमि 8षष cनयम कब्र, cङीबारक BBD DDDD DDS DDDD DD BBBD DDDD DDD DDDD DDD ७१३७ीशज कtन आप्बाश्र७ जाछ कब्रिण, ७श्छग कैनबूर अङि इकब शश्tणe witज निकि३ श्रेशायश् जबूक जङ कब्रिtण अक्छ चर्भ श्रें८ष, ७३ चर्ण शाडानाद्र जठानि जछि कुकद्र शश्न७ जननपूर ठाशी ज५४ाम कब्रिघ्ना थाएक। cवी जबाडग्न करण 6यtनाछिठ कञ्चिद्र cधारचकब्र छछ कई नकज वि१ान कब्रिब्रांtइन ! अश्छन् हण a३ छtग्र इश्क षादक । मलमांगङएच *ई छोएब्रङ्ग सिंवत्र निषिद्ध हरेंग्रांप्रह ० ।। ৭৭ । গোবলীবর্ণগুরিঃ । वर्णौवर्क थरई दूषडएक दूकान्न, फथांs cगी भक भू१िक पनौष% ७३ लक अब्राप्त्र जानe नैज दूरखएक दूषद्रि। cर इन ७की नकstब्राrण जर्ष cवा५ श्रेनe जाब्र७ नैज बांशtड जर्ष cषा५ रह, छानून नभ मtप्राrण *ई छप्रिं हरें★ धाक । १४ । रामॆकूछैौधङाष्टछांब्रः । पङ्कणै नभौष्ण अडाउ छसृजा छाछ । गाब्र हरेवाब्र गद्रमा क्शिाब्र छाङ्ग कोब्र शनिक विणण्ष नजारेब्रा बांश्tठ झ्णि, ग१म प$कूी नधौtग BBBB DDDS DDD BBH DDDDS gg DD DBBBDDD DBBBD बारे छ इरैज ७शः witब्रम्न क७ि रिङ हरेण। ७२छण cद इप्ण tशब्राज *ग्रजांग्र कूरैरे श्ब्र, cन*इरल *श् छांग्र इ३ग्र १ॉक । १० । पूर्णांक्रब्रछांद्रः । १शषर७ पून नाशिग्र वाप्नब कठक अtन का द्र थाeशाब्र जक्ररब्रब्र भफ हरेब्रांप्इ, जर्षी९ वैनं अश्क्र• क#िब्र काफ़ेिब्र भिद्रीtइ cष, द्धांश कि ৪ “ৰেঙ্গোজমেৰ কুৰ্ব্বাণে সি সঙ্গোইপিঙুণীয়ে। tब६*ाॉ६ अंछtठ निकि६ cब्रॉक्रमोदी कलशैक्षि: ॥ ফলশ্রুতিদিদং মূগা মাজেনে রোচনং পয়ম্। cétब्र। विक्क्रब्र caांस दष tछबजrtब्रfछनम् ॥ चच् छीsंीयूङ्-- भिष निचर अनाज्ञांधि थनू १छकजङ्ङ्कान् । निtजषत्रूछ: भिकडि डिङभनाछि वाणकः ॥" उज पथ-निवाणिानछ म पनू प७निारू ७ष यात्राञ्जन किन्ता cब्रांजी* ठष)८षtवांशभाषांखब्रफरेण: aयाणांछब्रन cवांचगरेब्रव कर्षनि विषtख ।।' (मजबानेछु । )