পাতা:প্রবাসী (ঊনত্রিংশ ভাগ, দ্বিতীয় খণ্ড).djvu/৭২১

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ՓՊe প্রবাসী-কান্তন, ১৩৩৬ [ २>* छांनं, २ग्न १४ SATTTAAAS S SAAA AAAA AAAA AA S SA SAS TT TAAA S দিয়া পড়িলেও আন্তীয় সে সহিতে গারিত না, সেজন্ত cशैब्रिांछ बलिष्ठां चशांडि उांझांब्र हिल । সীতানাখ আসিয়াই উগ্ৰৰূঃে বলিল,-“ৰি শুনছি।” वि*िन जांठक-विझ्शल नब्बtन जैौठांनांtषब्र लिएक চাহিল। মনে হইল কুসংবাদ চাপা থাকে না। চুপ করিয়া ५iक्tिण ब्रश माहे छांनिध्ना काउब्रछांtद जब क्थों छांनाहेण । विनिहनब्र जैौन्न चश्थ इeब्रांब cबो ७क्णा निभौधि झहेtङ छल जानिंtङ भिक्षांश्णि । भां¢द्र श्रृं८ष नद्रशब्रि यांद्र महसूख जांगिब्ब डांहांएक बैंiशिञ्च निंब्र निघ्नांtछ, मृग्न इद्देtठ बन्ध cदांडेtषग्न या cशथिब्रांtइ । हेहांब्र भtषा विभिहनग्न छौव्र अशt१ब्र क्षी भिषा, नगिनब्र बस्ने ... िबहे निशौषिाउ बश चानिाउ शहेछ। নরহরিকে কয়েক দিন হইতে ঘাটের পথে সৰ্ব্বদা দেখা স্বাইত। সেদিন নলিনের বউ-এর জল জানিতে বেলা श्रेशांश्णि, श छनषूछ, cगरे निर्बनडांब्र शशष्ण পাপিষ্ঠর কার্য্যসিদ্ধি করিয়াছে। সীতানাখ গু হইয়া সকল কাহিনী গুনিয়া বলিল,— “पानाइ श्वत्व सििल्ल ?” বিপিন হতাশভাবে বলিল,—“খানায় খবর দিয়েই ब रुद्रश क् ि? उiएक ¢ङ चांद्र घtब्र निष्ठ *iांब्रड् न। " গীতানাথ গর্জিয়া উঠিল—“কাপুরুষ, একটা অসহায় মেয়েকে জোর করে ধরে নিয়ে গেল, তার উদ্ধারের চেষ্টা न कtब्र शंठ-१ el?tछ वtग चांtइ ! गयाब क्लानांद्र शांढ़ । चाण. उब्र ऐकांद्र कब्र । बांशदद्र ब्रङ रूि তোমাদের গায়ে নেই ?” বিপিন ক্ষোভে চুপ করিয়া রহিল। जौडांनांर्ष डांशब्र शं८ङ ७कtी बैंकॉनि ब्रिां বলিল,—“নাe ওঠে, আমার সঙ্গে খানায় গিয়ে এজাহার দিয়ে আসবে, তার পর ষা করবার আমি করব।” चिनिन जनिकूरूछांtद छू-७कदाब्र हेटख्ठः कब्रिण। बाङ्दष्क शब्रिवृt णहेब गिबांtइ, चांद्र बर्षन “ठांशत्क ঘরে লওয়া যাইবে না তখন এত হাজাম কেন ? चड़र्णिनौब छणारे भण, नङ्का ठाशंब जैौरश्न मख्न ভাই অবস্থাৎ এক রাত্তির ব্যারামে মারা পড়ে। অতএব गर्दारैcगई थकालांग्निनौब्र कणांtण छां★ांदेह ठांशांब्रl cकरन নিঃশ্বাস ফেলুৰ ! বরং তাছার উদ্ধার না করিলে সমাজে ठांशांब्र ६ कां रक इहेष्व न, किछ ऐकांब्र कब्रिह्मां घट्द्र इन क्रिण कि चांद्र ऐ*ांइ जांद्रह ? किछ नैौठांनांtषब्र उॉफ़ॉब्र ठांशएक ऐfौtठ हऐन । पांना आंभ श्रेष्ठ cषज़ cङ्गांन बूब । उभाक्रम थांनात्र उथन नृउन शंtब्रांशी चांगित्वांtइन । नरौन दूहरू, गाब भूनिग जाहेरन थtवनं कब्रिहॉाइन। डिनि उनिहाई গ্রেপ্তারী পরোয়ান সহ একজন চৌকীদারকে গীতানাথের সহিত পাঠাইলেন, বলিয়া দিলেন, তিনি কাল সালে বদরপুরে যাইবেন। जैौडांनांर्ष ११न 4ां८भ शिब्रिल उषन जकाः शम्न श्ध्न । বিপিন জিজ্ঞাসা করিল,—“চক্রবর্তী মশায়, এখন কি कब्रtदन ?* गौडांनांष चछश्नड़छांटर १र्ष कलिtउझिल, कभक्ब्रि বলিল,-“তুমি বাড়ী যাও, আমি এখনি সাহাপাড়া থেকে জনকয়েক লোক নিয়ে সোনাপাড়া যাব।” বিপিন শঙ্কিত হুইয়া বলিল,-"সোনাপাড়া ফয়েজের শ্বশুরবাড়ী, ও পাড়াটাই দে, সেখানে এই রাত্তিরে—” সীতানাখ, ধমক দিয়া বলিল,—“তুমি চুপ কর। निश्छद्र यांtपंद्र छद्र चांtइ, निरछद्र षtब्रव्र ति-बऐंरक dütन निरइ cशरणe छूमि क्षी कहेtङ न गाङ्ग । नैौडांनाथ कङ्कदउँौं बांटबब्र कृष cषtइ भांष्ट्रष, यांtप्रब्र बांtछब्र ७ অপমান সয়ে প্রাণের ভয়ে পিছিয়ে ধাকৃবে ? এতে যদি প্রাণ ৰায় সেও ভালো।” - विनिन नष्ठबूष निरबङ्ग बांग्रैौ कणिशl cगंण । जैौष्ठांनांर्ष गिब्बा नरीौन गांशंरक छदिब्रां गद कथा बनिण । नदौन उ९चनां९ शांछ इहेछ बनकरबक बनिई बूबक्रक जांfी निद्रा गैौडानांtषब्र गएक गा?ारेण । गौडांनांर्ष नशाण बांजा कब्रिड्रा छांविtख् णांजिण, cषषांदन उबावीब .विनि cषाद निम्बइ बाँकृदङ्मक इनश् अ*षांन इदेहज्र वैॉकॉरेबांब्र ८कडे श्रेष्ठ विद्रङ इहेब्राहिण, cनषोप्न देशबा ठांशंब ७कई क्षांश उांशब्र फेकांहद्वद्र चच् छणि, चषा ऐशंङ्गा ज्बप्वशैङ्ग चन्शृ७ ।। সোনাপাড়ায় যখন তাহার পৌছিল তখন বেশ