পাতা:প্রবাসী (ঊনত্রিংশ ভাগ, দ্বিতীয় খণ্ড).djvu/৭৩৮

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৫ম সংখ্যা] छांशांटक (डनछन बांडरनट बांब1दिeपिंड कद्विषांद्र देव्ह पूनाचरत्वe जाबाrवह छिरख बांदे । जांक्शा ब्रावि, “न जांडू कांबई कांबाबांबूर्णturn timfur win companionate marriage (of now तिलांह), divorce { दिलांइ१ि८व्हक) यकृfलब कछवाड चांवाटतब লক্ষে জীৱ পীতাম্বারক ॥-ss डौबटबद्ध नवाकृगूठिांड खछ. जडौडेनांटछद्र ब्रछ बन्न ७ बांग्रेौ डेछटकडे बांडी-बांग्रेौ बर्द्विाविवौ ७ महशकिंगै । *नडौ¢क शबिांध्टूबर,* जडáद बांबौद्ध अदिलाब जावड cबाषाख कूद कबि बाडे, डाश८क cझाझे *वॆि बांशे । शछिछ cव कर्डवा, cष पर्व, cद दांजांनष-नङ्गौबe তাছাই কর্তব্য, ধর্ম ও স্বাত্রাপণ । जांद्रौ८क बांबक बङ कब्रिज्ञ tबतौब्रtनडे tछदिब्राहि ॥ ●छि बांग्रैौहै च', 'Gड्iं खांश्ासैौनि षषिं ।। ८ष ८खiब बोध्रैौं शथ्रश्नः, cण चषिांराङ्ग प्र, ठोहॉब्र अश्छि firt कबैिबांब मबिछह ब1 जनविछह जांभब्राँ cणांद१ DD D L D SLS Y LL DDDD DDDDD DD DBBDS DDD LLS *नडबारब्बू बाङ्गर६° बांशांप्रब तपू नूछकछ बोडि बtर ! यांनीब, निनौष, <लाzा9थ. पूंछौध, विक्रबॉ. #ाकूबबl. बूझया, जॉर्जियां. cशैव अकृॐि नमक गषकषाकरू शकभार बरे वाcaब्र cषान, 4ारे छैक्विब्र ममर्षन কঙ্কিৰে ।

  • वज बांर्दक श्रृंकारइ ब्रषtद्ध छद्ध cगरुडां६ ॥” इब्र ड टर्क छैüzव, हेह ¢कवण जाशनं★ ब्रठिंब्रां निम्नांtइ, खांté गाँब्रगड हघ्र बांझे ॥ छर्कइ:ण शक्खि चौकांड कब्रि cश डांहांझे मङा, उषांनि जांत्रञ्च जोशाद्दक्ङ्ग 4डे नहशaिनै ७ गहकर्दिशैब्र जाकर्ष üzशक कब्रिब्रां, अठौtळाञ्च चाश्र्न जश्न कबिक ब बब्र१ आशाrजब cनौबदवा बहिबाब चाधन पाहांटङ खबनीषांबद्दनत्र छौवहन नङ] हऍब्रां ॐg, tणअछ 6चागंणन tछड़े कब्रिस ॥

गऔर ७ जांछूटतर छैनत्व छांदउँौद्र गणडांब थद्र वृeि । जांबांप्नद्र वान डब्र. श्रांड थtभक जबूणा वन श्रीब्र मार । नांदोंौक cरवन ●कबि taाट्टत्र चांधौटक अहन कaिtछ इझेtस ७ जडौच्चवक्Tाश इक कब्रिटe इश्र•, नूक्षक cउवनई बकसिंडे रहेrछ एश्लेtष 1--- cद गझौशनी cथभ वज्ञ ७ नोब्रोक धक जालौकिक औषtनद्र =णर्न चांनिज्ञ cवग्न, cन ८थक कानबूवा नरह, लेश्रिब्रज आकर्षन नप्र, छांश कनTाrन गडिङ, नवांश्च-जोषtवश्व थाäतttष नूडे ७ वर* बॉडाछठ হওয়া চাৰি ॥... लांबडवार्षब नांग्रैौश, भद्यैस् ७ यांइचरक दब्र१ कबिब्र! cष cकांम७ लांछि थांना ७ बाश्र्नtरू जइन कबिटङ गायब । बूबई हङक जाब्र बिकाप्नेह हङक, पार्ने ढुम्रेक बोइ बर्डीदै हप्लेक, गझै नाच्नौ क्लिङ्ग छिद्र-गह्वांबी--ifछइ काई कबी, भछिब्र षtई षबी । जाबtठक याहीन शंख्शप्न बेहांब इब्रि इब्रि वृडेखि चारह। DDttttBB BBB B Dttt BBBS kD DDDD इङही आशाइ ब्रषष्ठाजिक. नौठी ● rजौभदौ शाछद्र गरिठ बनशनिनां, बिस्तित्व यिग्नो क्षयाँ gकTोडिदिँ छुाद्र प्रोब्रकोर्नी । औक्रनद्र विलिङ्ग cचट्ठब ● विजि थांsाrबडू बरश७ छोड़उदtर्दब नाडी बांनव जांगम अफिछ बक्र्नक् कवित्राइव । बकवाग्निौ श्राओं ७ tवम्बणै, पृव, जोनावडी ७ छैछद्रछाइडौ, नौठl, जडी, कबब्रटिौ e bचंदj, जब| ● इलङ्ग, पर्कअsां ब्रक नज्वावज, sिडूनै चरिवॉब्रिक नहीयब्रांशठौ tत्रौष्ठऔ, नश्दूड, नचिर्यो, cपाषावाने, उiब्रांताचे ७ थहण" बइडि बरौशनौ वाईो चौब चौद्र बडिलांब्र बहिबांग्र छांब्रखवर्वरक वछ ● कृङॉर्ष कवॆिब्रोटहन ॥ कडैिगीषव्र-गांब्रांब्र पर्द-अङ به سوی) नन्छिटबद्ध शांहः किडू, खाँहां* खोज, 4 बखविचारन cबन जांबद्र! बां छजि ॥ छांहारबङ्ग जावर्ण ●षमe शब्लौकांइ पिदध्न ह*ब्र! ब्रहिब्रांtङ ? 6नरे शक्नौकांशैब जांकन अह्न कद्विघ्नां cषष बांबद्र! कुल ७ जgव छेउछाटक बा होढाडे ।....

    • चाश्र्न-4* छांश्-शैक्न-* शबबूर कछवां जांबांग्रज्ञ tरन ज्यू कारणब्र छश्न बाँ श्त्र, झड वन छाब्रड थुप्इ श्रृश्गका अत्रण-वॆीtणङ्ग बङ &fafक्न मद नव सैबला अफिखांड हा ।

कृत्वाrगढ़ cछोtजब बागै, इब्रारगब विचsानौ दूष, वृत्त्वांtणब बांश्टिबद्र थांकुचद्र ७ गयाद्ब्रtद उiहांब दिइयहांज! ज*ब्रां छघू कन्नाडेtछ णांtब्र, किज जांभङ्गl tषन मtन ब्राषि, छकक्लक कब्रिट्नरे লোনা হয় না ... छांत्रि जांच कवेि, छां★८ङङ्ग बाँध्नौ छांबणैश्च नछाछांब्र अ{षांबांट्रक बtá भाविग्रा, जठीप्रब ७ यांङ्गtन्नह जबढ़ जाननtक बब्रन कबिब्र बर नव शtष नस बस चङ्काषग्न जाछ कब्रिtर। छांब्रजौग्न बकवोष छात्र ७ cनबांब्र गश्डि ब्रू:बांध्णब्र नवनएषांtब्रश्नाजियौ श्रछि बिछयांवृत्रठा ७ वृष्ठाब गबचय ७ गामछमा कfब्रडा छावtछद्र बांद्रौ विtवत्र जायर्न-हाबौष्ठा इम्प्लन । “जविकाश", "अषिकाब":बनिद्रा स५ छेक्र कौ९कांश ब1 कनिम्नl taयtभ ७ फ itनं, कलाit१ ७ tनलाग्न खप्रक्षक वधूबग्न ७ यत्रजबग्न कब्लिग्नl चांनन चाशार♚ब्र थाछ* कaिtतब ॥ शूद्राबद्र गहिङ यङिदांधळ ७ न पार्ष बाल, बब्र१ नहtषांत्रिठाब ७ मश्विजtन बांग्रेोब्र वडिङ्ग • बझ के इस्नेहद । शूद्ररवञ्च ७ मांबौद्ध ॐछरङ्गब्र नशtवठ गोषबांद्र छङरग्नब्र थांच्चदिकांन इग्न । कि गूक्ष, कि बांग्रैौ ८कह* चव्जलाद्दष जांनब जांच्चाङ्ग गब्रिगृ4 बकान ७ भूeजांख कब्रिटठ गांtब्रन ब । शूबरबद्ध लङि जांब बांब्रोब्र ®छिद्र नएषांtत्र चांबचबग्न श्रृंप्रब अठि*. बाब cनरे वृंह नाङ्गो धृह वै ७ छ९गtवज्ञ चशिांजी अहिंबथग्नौ नखांखौ ॥ (মাসিক বন্ধমতী ১৩৩৬) चैयडिणांल जां* দারার ধৰ্ম্ম-মত घांब्रांद्र श{शछ कि हेिण छबिद्दछ क्लङ्गेष्ठल जॉकबtब्रङ्ग शहfब्र अहिछ éiहांद्र किकि९ छूलबांबूजक बिछांद्र यtब्रांछन । cकनमा छरिडौ बैंगृजब इछबtङ* कांटरूब्र बtन कटा । जामदृकब्र शांब्रल शांहsiन। छाशब्रि यनिष्ठांबद्दहब बह-क्लनौब tणावाकbl शा9ब्राझिट्टणम ; छंगहांद्र चक्कण ७ &थकुछ वर्द्धश्रद्ध के बहक्कनौब्र cणांषitक ●ाहम्न fझण : छो* डिबि७ रूTरकब्र fहब्र ह*ग्नांटहन ! जांकबtब्रव्र व4 कि हिण cजांरक दूकिrठ शांबिठ ब1; किश्वl cव प* छिनि बांनिtडन श्रीकूरवद्र जरूिषtान टांशग्न ¢कान गबेिखांव बां* ; जडड: ब्रिथ_णitझ्ष पूंत्रिक इडान ह*ब्रारइन। जाहिद्री श्नृशांत्र ७ शब्लौ tव\sाबitजब अछि बाक्नाच्ने विश्व गत्वाक् गाल्ब्रो गर्छ श्राप्णइ गाङ्गी, गांबtञ्चद्र थधि छैनांनङ, छिलटलद्र जाब, जिब्रुवांद्र गोशtछद्र tछक्षझै ७ कtäव्र ग७िड वङ्गवांटन हादिब्र ह*ट्जन । कट्ठनूद्र निबौद्र हेबांशङ थांबांब्र tव#टक यषtव शांजौद्र छांक शक्लिण ; बॉसॉऔब्र जङ्घडांब cजtन नकटजब बूथब अण सलाहेब cत्रण-पांश्ला बांश्श क्ट्जिन । नाजौ नांप्रद दूसाहेब्र' ण्टिनव इंडे-बई cदन अकs जावाब्रन कण; 4 ब्रकष cयथा हिन्दूमरन नूछन थांबवावी, ●ो थोडेंtज जरु •ांनं इबब ह३ङ्गां दांडेंtव ; चर्बीषांtब्र जांद्रणf tबषिदृष्ठ शोरेटवब ; विtनदछ: नब्रांकड़े हांबाrजब 4कडिऔ. ७शtब ; est