পাতা:বিশ্বকোষ চতুর্দশ খণ্ড.djvu/৭০

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भुटेकोड t १२ ] भदूtकोछ আছে, দৈননি.* छशदारभङ्ग मिजाँक्हांच्च ७कविन ॐाशच कचविदछ ददेरछ बधू ७ टेकल्लेड मारक इश् बाबव निर्थक श्च ॥ ५रे शबब्र कूईगृ*शिङ नृथिरी अनहबtण बिबधः । चूंक्वैिोध aहे चक्राद्ध गञ्चिदईन झटकाश्म अथानन कशरख छइनहि प्रथइधरच वनवांम कब्रिप्ड चांदब्र, उiशबह लेनाइ उडाक्रमब्र बछ उभवउँी cषाभक्रिया उत्रदम् विडूछ निकके श्रबब कब्रिरथम । किरु उषय चिनि अत्रत । इङब्रार जनtछानाञ्च इहेब tवाषबाब्रः कायझ्दचच्च रूबि*ाष्ट्रणिद्र चक्षङाभ छैाइोच्न कप्-f aएको कङ्गारेख्नन सिक्दै आएथछ चाअछात्र बाबा विकृद्ध कर्षवण झर्न रूबिब दिल्णन ॥ cनदे गांवकर4ब्र बन श्रङ ७क जबब उ५भत्र दद । ऽ छोरीब नड ८षके दकिन श्रडब कबिर्लीब चअडान चिहब कथिन कर१ अप्रुप कब्राइरनन ॥ ऋकब्र छोच अदे कर्पबब विकॅिड द●बाइ छांश इहेरखंड *क चाइब्र पैं★९-tश्च बरेण ॥ <**पंथ चह्छ खे९*छ ददेच्चाहे মধুপান কম্বিষাক্স ৰক্ত প্রার্থন কৰে, এই ৰিষিত মছনেৰী डांशब मान ब्राविरगन वधू, चाब cभtवांख् चइब्र खेदनद्र इहेब्बाहे थशांमांडांश्च हरक कौटल्लेब्र छांद .cभोक कfहेब्राहिण, डांइ cववैौ डीशञ्च जांब ब्रॉदिtणन कछेङ । उपन वशगांडी ८नई अन्नबरुद्धरक कश्रिणन,-cरूiबब1 त्रिकून अश्ङि दूक कछ । छाश दहेरण३ विकू ८ष्ठावादिरभद्र यां+गररांड कञ्चिदम । बषि cउभब्रा निरछब्र थार्थनांब विकूद्र श्रख मिइड ह७, डाश इहेtनरें डिमि cठामांविभरक ब५ कब्रिरष्ठ नाहिtषम, भरक९ क्लिनि७ दथ कब्रिटएक नृभदीहहेएदम मा ! ७श्करण भशमांश्चt कईरू cबोरिड हश्च cनहे चक्रब्रपट बाबरवाब विकृत्व नईौटन अमन कडिtछ कब्रिप्ङ नाडिचश्छि. अकtएक cवचिदङ •fहेण । पछचन उtदांब्रां बचांररू वणिण, শ্ৰষ্ঠ ভাষা কোম্মকে এই স্থানেই कक कहिय । ' चङ७ष पनि ड्रवि बौदिठ थकिरछ देश कङ्ग, छाश रहेरण बिंकूद्र निझा ठण कञ्च । जनडइ-बथा डीच् दृश्इ दशविष उव पात्र ৰোগনিদ্র জগৎপ্রন্থ মহামায়াকে এমন করেন। খোদ* बाँकी छटर छूटे श्बा वकाँrरू कश्रिणन, बदलांत्र ! कि निकिङ • *ामांब छद कब्रिटन, cङीमाब cकांत्र थिबकंवा कब्रिtङ थिङ्गकार्य कब्रिब। छथन विबाश्र बदामाझरक कश्-ि } उभवन् िरिह जैसूरु हरेवा बचाहक जैछ aवर ध्षाचकन वर्७६कोछ जहज्दरल्क क्षल्डि गरेनन। च्कम चिनि 'वपू. ७ ककेब्ररू भन्नाइड फरिच् भक्र्थ श्रेष्भव म । थनच्० कनाञ्च चषकाच दश पूषाशांब अबू, to st गाचाइन ●रे जिम रीवरक वश्व कब्रिल प्रनषर्ष ददरणन । उचम बथा चर्करवावभ विक्च अदा जरूरवाजब थॉईड थकन्नै क्णिाकक शिलिकखि थाह१ कब्रिरणब॥ विकू cगहे कििणात्र लेनब वखाद्ययांम बदेहा कांइषेि८भद्र महिछ मूक करिष्ठ कfधरछ थन बध्वा यावश्व कब्रिटणम ॥ cणदे श्रृंखि छtण भध इदध्ण छभवान् विडू नैोक बाजांछ चरणम्र बरणम्न थरथा थाकिग्रा ८गरे अद्यञ्चवरबद्र नश्डि मिछडङ्ग बाइबूक करङ्गज ॥ डचथ बभदनखि विकू cनहे डेङइ चशबएक क्थ कडिrछ चनवर्ष दऐरणब ैव चाशरड बकाच नाच्चित्र छद्र ह३ण । कथम cमरे दणदििख चछद्रदक्क काङ्ग राइ झश्ाबाइोछ किरवाश्डि इहेब मिज श्रख्हे विकूरक कश्थि,-<श् वाक्य ! cडांबीच बूकरेमऋषा चाषबी फूडे श्झाश्,ि फूथि बद्र उवार्थबा DD BBB BDD DD BBBBS DD DDD BBBBB कडिटव, थांबद्रा काशहें नन्नादन कङ्गिव । डांशष्टहब cनहे कांक, छबिद्र! विकू वनिcजन,--'cरु कशबणइह ! बषि cखांबाcवड चावारक किङ्क बिबाब्र थारक, खरब cडाथब्रा थाभाद्र दश दक, थरे वञ्च अदान कब्र ' जइबदइ ७ऐ कथाहजनचड हरेण बा। छtएाङ्ग कहिण, cप्लांथाब्र बिकल्ले श्रेंटड३ थांथारबङ्ग षष cषाको नाइ ? छटव cरुषारब थम बाहें, छूथि चावादिभप्रू ०गश्चन शप्न दद कब* जाशप्यृ थई वाश उनिद्या छन्नदान् विकू हेनिररू बकाटक कथिrमय,-cडॉथाब्र पखिछनिने निजांरक कैब के९ख कब्लिब ५३कcन वाद्रन कब्र, शशrण थानि उदात्र उगड चवशन कश्चिद्रा र बशवन चछब्रदशक कम कfकटङ नम* दरें । ৰৰ শিশাঙ্কে উদ্ভূত नश्चिकिनाप्क थक कऋिणत्र-कथा वया ५वर चाब थकके

          • {इम्ब राजा ऋ**कध्रच्ह श्रकfच .

দেন, ৰে গৰ্বাঞ্চ এই বন্ধুকৈটভ ষাকে মা মারি ফেলে, ब% ७ ६कबईश्लबहरहएक गcचरिङ ककन अब वरः। 。。* . . .“ از هم پا نهاد শুখিঃক্ষণে রঞ্জি গেই ,